मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर विवाद, आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग
आरएसएस पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों का आरोप
यूएससीआईआरएफ के अधिकारियों ने आरएसएस के नेताओं को अमेरिकी सरकार की उच्च स्तरीय बैठकों और राजनयिक सम्मान से दूर रखने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जाएंगे। वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग के कार्यक्रम में भाग लेंगे।
हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स का विरोध
मानवाधिकार संगठन हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी भागवत के दौरे का विरोध किया है। संगठन ने कहा कि यह मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हिंसा से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि एकता का जश्न धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को छिपा नहीं सकता।
कनाडा में भागवत के समर्थन में संगठन
कनाडा के 100 से अधिक संगठनों ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। इन संगठनों ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले ठोस और स्वतंत्र सबूत होना आवश्यक है।
यूएससीआईआरएफ की भूमिका
यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) एक स्वतंत्र सरकारी संस्था है, जिसे अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 में स्थापित किया था। इसके सदस्य राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों द्वारा नियुक्त होते हैं। यूएससीआईआरएफ का कार्य निगरानी और सलाह देना है, और यह किसी देश या संगठन पर प्रतिबंध की सिफारिश कर सकती है।