यरूशलम में अल अक्सा मस्जिद का बंद होना: ईरान के हमलों का प्रभाव
यरूशलम में अल अक्सा मस्जिद का बंद होना
1967 के बाद पहली बार रमजान के अंतिम शुक्रवार को यरूशलम की अल अक्सा मस्जिद को बंद कर दिया गया। इजराइल ने सुरक्षा कारणों से 5 मार्च से इस मस्जिद को बंद रखा है। इजराइल ने एक वीडियो जारी कर बताया कि ईरान के हमले अब अल अक्सा मस्जिद तक पहुंच चुके हैं, जिससे मुस्लिमों की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में इजरायली सरकार ने मुस्लिमों को नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, फिलिस्तीनी मुस्लिम जुम्मे की नमाज पढ़ने के लिए अल अक्सा मस्जिद पहुंचे।
इस बीच, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एल्बनीज और गृह मंत्री ने सिडनी की सबसे बड़ी मस्जिद का दौरा किया। उनका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के प्रति समर्थन दिखाना था। लेकिन मस्जिद में कुछ मुस्लिमों ने 'अल्लाहू अकबर' के नारे लगाते हुए उन्हें बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑस्ट्रेलिया इजराइल का समर्थन कर रहा है, जो फिलिस्तीनियों का दमन कर रहा है।
जब ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मस्जिद से बाहर निकले, तो उन्हें अपमानजनक शब्दों का सामना करना पड़ा। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब मुस्लिम शरणार्थियों ने उन्हें गालियां दीं, जिनकी ऑस्ट्रेलिया में आवास की व्यवस्था की गई थी।
फिलिस्तीनियों ने यरूशलम में इजराइल के आदेशों का विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भागना पड़ा। जब वे अल अक्सा मस्जिद के पास नमाज पढ़ने पहुंचे, तो इजराइल की पुलिस ने उन पर हमला कर दिया। इस कार्रवाई के कारण सभी फिलिस्तीनी वहां से गायब हो गए।
इससे पहले, 1967 में पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान भी मस्जिद को बंद किया गया था। उस समय इजराइल ने पूर्वी यरूशलम और पुराने शहर पर कब्जा कर लिया था। यह मस्जिद एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जिसका विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। ईरान युद्ध के दौरान इजराइल ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सभी धर्मों के उपासकों के लिए पवित्र स्थलों को बंद कर रखा है, लेकिन इसका सबसे अधिक प्रभाव मुसलमानों पर पड़ा है।