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यूरोप की राजनीति में बढ़ता तनाव: मैक्रों और मेलोनी के बीच बयानबाजी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हालिया बयानबाजी ने यूरोप की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब मैक्रों भारत से लौटते समय मेलोनी के एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जानें इस विवाद की जड़ें और क्या इससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।
 

यूरोप में राजनीतिक तनाव की नई लहर

एक पुरानी कहावत है कि छोटी चिंगारी भी बड़ी आग में बदल सकती है, और इस समय यूरोप की राजनीति में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच अचानक बयानबाजी तेज हो गई है। यह विवाद तब उभरा जब मैक्रों भारत की यात्रा से लौट रहे थे। भारत दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की थी, लेकिन लौटते समय मैक्रों का बयान सुर्खियों में आ गया। जब पत्रकारों ने मेलोनी के बयान पर सवाल किया, तो मैक्रों ने तीखे शब्दों में कहा कि बिना पूरी जानकारी के कुछ मत कहो। इस प्रतिक्रिया ने यूरोप की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत से लौटते ही मैक्रों इतनी नाराजगी दिखा रहे हैं? क्या यह केवल एक बयान है या इससे फ्रांस और इटली के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है?


भारत दौरे के दौरान की घटनाएं

दरअसल, मैक्रों 17 से 19 तारीख तक भारत के दौरे पर थे, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लिया। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई। लेकिन जब वे भारत से लौट रहे थे, उसी समय पत्रकारों ने उनसे मेलोनी के एक बयान के बारे में सवाल किया। यह बयान फ्रांस में हुई एक मौत से संबंधित था, जिस पर मेलोनी ने टिप्पणी की थी। मैक्रों को लगा कि इटली की प्रधानमंत्री फ्रांस के आंतरिक मामलों में दखल दे रही हैं।


मैक्रों की प्रतिक्रिया और विवाद का कारण

इसीलिए उन्होंने नाराज होकर कहा कि किसी भी टिप्पणी से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए। मैक्रों ने यह भी कहा कि जो नेता अपने देश के मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को पसंद नहीं करते, उन्हें दूसरे देशों के मामलों में बोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। अब समझते हैं कि पूरा मामला क्या है। दरअसल, हाल ही में फ्रांस में 23 वर्षीय दक्षिणपंथी कार्यकर्ता की मौत ने पूरे देश में राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया।


फ्रांस में बढ़ते विरोध प्रदर्शन

यह घटना ल्यू शहर के एक विश्वविद्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुई, जहां कुछ लोगों ने उस कार्यकर्ता पर हमला किया, जिससे उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए। मैक्रों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि कई देशों में वैचारिक नफरत का माहौल बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है। इसी से विवाद की शुरुआत हुई। मैक्रों को लगा कि मेलोनी का बयान सीधे तौर पर फ्रांस की राजनीति और वहां की सरकार पर सवाल उठाता है। उनका मानना है कि किसी भी दूसरे देश के नेता को फ्रांस के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना चाहिए। इसीलिए उन्होंने पत्रकारों के सामने कड़ा रुख अपनाया। हालांकि, इटली सरकार की तरफ से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई।