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योगी और फड़नवीस के बीच संसदीय बोर्ड में शामिल होने की होड़

भाजपा के दो प्रमुख मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फड़नवीस, संसदीय बोर्ड में शामिल होने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इस दौड़ में उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं और संभावित मंत्री पद की चर्चा भी शामिल है। क्या वे अपने वर्तमान पदों पर रहते हुए इस बोर्ड का हिस्सा बन पाएंगे? जानें इस राजनीतिक परिदृश्य के बारे में अधिक जानकारी।
 

संसदीय बोर्ड में शामिल होने की कोशिश


भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संसदीय बोर्ड में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है। वर्तमान में, कोई भी मुख्यमंत्री इस बोर्ड का हिस्सा नहीं है। पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बोर्ड में शामिल किया गया था। अब, दोनों मुख्यमंत्री इस बोर्ड में अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत हैं, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलेगी।


हालांकि, यह सवाल उठता है कि क्या उन्हें सीएम रहते हुए इस बोर्ड में शामिल किया जाएगा या उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर आना होगा। हाल ही में, दोनों मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिले हैं। पहले योगी आदित्यनाथ ने मुलाकात की, उसके बाद फड़नवीस ने। फड़नवीस की मुलाकात के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि उन्हें केंद्र में शिक्षा मंत्री बनाया जा सकता है। इसके साथ ही, यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें मंत्री बनाकर संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया जाएगा।


हालांकि, योगी और फड़नवीस दोनों ही सीएम रहते हुए संसदीय बोर्ड में स्थान चाहते हैं। केंद्रीय मंत्रियों में शिवराज सिंह चौहान को इस पद के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। यदि सोनोवाल बोर्ड में बने रहते हैं, तो एसटी समुदाय का कोटा सुरक्षित रहेगा। इस स्थिति में, एक दलित, एक ओबीसी और एक महिला की जगह बनी रहेगी।