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राघव चड्ढा का नाम पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब, राजनीतिक विवाद बढ़ा

पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद उभरा है जब बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम 2026 की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब हो गया। चड्ढा ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर आरोप लगाया है कि उनका नाम जानबूझकर हटाया गया है, जिसे उन्होंने राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बताया। AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची का निर्माण चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
 

पंजाब में वोटर लिस्ट विवाद


राघव चड्ढा की ताजा खबर: पंजाब की राजनीति में वोटर लिस्ट को लेकर नया विवाद उत्पन्न हुआ है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम 2026 की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं पाया गया। इसके बाद चड्ढा ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाया गया है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बताया है। दूसरी ओर, पंजाब की AAP सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची का निर्माण और उसमें नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है, और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।


ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में स्थिति

पंजाब में चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत तैयार ड्राफ्ट मतदाता सूची 13 अगस्त को जारी की गई थी। इसमें राघव चड्ढा का नाम उन प्रविष्टियों में शामिल किया गया है, जिन्हें ASDD- Absent, Shifted, Deceased and Duplicate श्रेणी में रखा गया है। उनके नाम के सामने Permanently Shifted यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित लिखा गया है, जिसके कारण उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है। यह मामला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। वह 2022 में AAP के उम्मीदवार के रूप में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे और अप्रैल 2026 में बीजेपी में शामिल हो गए।


चड्ढा की प्रतिक्रिया

राघव चड्ढा ने अपने नाम के आगे परमानेंटली शिफ्टेड दर्ज किए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वह पंजाब से निर्वाचित राज्यसभा सांसद हैं और चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के अनुसार सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम को सत्यापन के लिए ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए, भले ही उनके रिकॉर्ड पर कोई फ्लैग लगा हो। चड्ढा ने आरोप लगाया कि उनके मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया।


पिछले चुनावी रिकॉर्ड का महत्व

चड्ढा के मतदाता रिकॉर्ड को लेकर विवाद में उनके पिछले चुनावी रिकॉर्ड का भी महत्व है। 2022 में राज्यसभा पहुंचने से पहले उनके हलफनामे में दिल्ली के राजिंदर नगर क्षेत्र में मतदाता पंजीकरण दर्ज था। बाद में पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने अपना मतदाता पंजीकरण पंजाब में स्थानांतरित किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पंजाब के SAS नगर यानी मोहाली में मतदान किया था। यही कारण है कि अब ड्राफ्ट रोल में उन्हें स्थायी रूप से स्थानांतरित बताए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया है।


AAP का जवाब

राघव चड्ढा के आरोपों पर AAP और पंजाब सरकार की ओर से अलग रुख सामने आया है। पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि SIR चुनाव आयोग द्वारा संचालित प्रक्रिया है और राज्य सरकार का यह तय करने में कोई अधिकार नहीं है कि किस मतदाता का नाम सूची में रहेगा या हटेगा। AAP ने भी चड्ढा के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि चड्ढा का निवास दिल्ली में है और यदि उन्होंने अपना मतदाता पंजीकरण स्थानांतरित कराया है या करवाना चाहते हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।


मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया

चड्ढा का मामला पंजाब में चल रही व्यापक मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के बीच सामने आया है। पंजाब में SIR के दौरान करीब 20.66 लाख मतदाता ड्राफ्ट रोल से बाहर किए गए। यह राज्य के 9 जून 2026 तक दर्ज कुल 2.14 करोड़ मतदाताओं का लगभग 9.63 प्रतिशत है। इनमें करीब 9.44 लाख नाम ऐसे मतदाताओं के हैं, जिन्हें स्थायी रूप से स्थानांतरित माना गया, जबकि लगभग 5.74 लाख मृत मतदाताओं, 4.12 लाख अनुपलब्ध या अनट्रेसेबल मतदाताओं और करीब 1.19 लाख डुप्लिकेट प्रविष्टियों की पहचान की गई।