राघव चड्ढा का बीजेपी में शामिल होना: आप को बड़ा झटका
राघव चड्ढा का बीजेपी में प्रवेश
राघव चड्ढा, जो आम आदमी पार्टी (आप) के सह-संस्थापक रहे हैं, ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ले ली। यह निर्णय उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। उनके साथ आप के छह अन्य राज्यसभा सांसद भी बीजेपी में शामिल हुए हैं, जिससे अरविंद केजरीवाल और पंजाब चुनाव से पहले पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है।
विलय की प्रक्रिया
चड्ढा ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विलय की प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने बताया कि आप के 10 में से 7 सांसद बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, जो कि दो-तिहाई बहुमत है, जिससे अयोग्यता का खतरा नहीं है। चड्ढा के साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल और अन्य सांसद भी शामिल हुए हैं। अब आप के पास केवल तीन राज्यसभा सांसद बचे हैं - संजय सिंह, बलबीर सिंह सीचेवाल और एनडी गुप्ता।
'गलत पार्टी में सही आदमी'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा ने भावुक होकर कहा, 'मैं सही आदमी हूं, लेकिन गलत पार्टी में था।' यह वाक्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संदर्भ में भी कहा गया था। चड्ढा ने आरोप लगाया कि आप ने अपने मूल सिद्धांतों को छोड़ दिया है और अब पार्टी व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है।
पार्टी से दूरी का कारण
चड्ढा ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से पार्टी से दूर हो रहे थे। 2 अप्रैल 2026 को उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को लाया गया, जो अब उनके साथ बीजेपी में शामिल हुए हैं। चड्ढा ने कहा, 'मैं उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहता था।' उन्होंने पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार की भी बात की।
आप नेताओं की प्रतिक्रिया
आप के नेताओं ने चड्ढा पर तीखा हमला किया। दिल्ली आप प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चड्ढा संसद में 'नरम प्रचार' कर रहे थे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट कहा कि चड्ढा 'समझौता' कर चुके थे। पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने आरोप लगाया कि चड्ढा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसे चड्ढा ने नकारा।
ऑपरेशन लोटस या सच्चाई?
आप ने इस घटनाक्रम को 'ऑपरेशन लोटस' करार दिया है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर डर पैदा किया। उन्होंने कहा कि सातों सांसदों ने पंजाब के साथ 'गद्दारी' की है। हालांकि, बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह विलय स्वाभाविक था। अब 2027 के पंजाब चुनाव से पहले केजरीवाल के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है।