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राजनीतिक प्रतिशोध: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा एजेंसियों का दुरुपयोग

विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारें एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही हैं। चुनावों के दौरान पुराने मामलों में छापे मारे जा रहे हैं, जिससे नेताओं को परेशान किया जा रहा है। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने ईडी के छापों का विरोध किया है, जबकि भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। जानें इस राजनीतिक प्रतिशोध के पीछे की सच्चाई।
 

केंद्र और राज्य सरकारों का एजेंसियों का दुरुपयोग

विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार विभिन्न एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है। सीबीआई और ईडी के दुरुपयोग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु और केरल तक, चुनावों के दौरान पुराने मामलों में छापे मारे जा रहे हैं, जिससे विपक्षी नेताओं को परेशान किया जा रहा है। हालांकि, यह केवल केंद्र सरकार की बात नहीं है; राज्य सरकारें भी अपने पास मौजूद एजेंसियों का दुरुपयोग करती हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी राज्य के पास विजिलेंस, पुलिस या प्रदूषण विभाग है, तो वे अपने विरोधियों को परेशान करने के लिए इनका उपयोग करती हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी, जिसने केंद्र पर सबसे अधिक आरोप लगाए हैं, वही काम कर रही है।


पंजाब में आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके नेताओं के घरों पर छापे मारे हैं। पुराने मामलों में फिर से छापे मारे जा रहे हैं। हाल ही में, आप के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर पर छापा पड़ा, और 10 दिन बाद ही वे भाजपा में शामिल हो गए। अब यह जानकारी मिल रही है कि पंजाब की आप सरकार लवली ग्रुप के खिलाफ मामला बनाने में जुटी है। इसी बीच, भाजपा में शामिल होने वाले दूसरे राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो गई है, उनके ट्राइडेंट ग्रुप पर प्रदूषण विभाग ने छापा मारा है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दिखावे के लिए की जा रही है और इसमें कुछ खास नहीं होने वाला है।