राजनीतिक प्रशिक्षण का महत्व: प्रदर्शन में युवाओं की भूमिका
युवाओं का राजनीतिक प्रशिक्षण
युवाओं के लिए राजनीतिक प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी और आइसा के प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित व्यक्तियों का प्रदर्शन अराजनीतिक लोगों के प्रदर्शन से किस प्रकार भिन्न होता है। 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया। इन तीनों ने बेल बॉन्ड भरकर रिहाई प्राप्त की, जिसमें उन्होंने यह शर्त रखी कि वे किसी प्रदर्शन में भाग नहीं लेंगे और शांति बनाए रखेंगे। इसके बाद, 13 अक्टूबर को जब सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचे, तो उन्हें बेल बॉन्ड की शर्तें तोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया और पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वे सात दिन जेल में रहे और आठवें दिन जमानत पर रिहा हुए।
दूसरी ओर, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च के दौरान सीपीआई एमएल की छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया, लेकिन वे बिना बेल बॉन्ड के रिहा हुईं। जब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उन्हें पीस बॉन्ड भरने का नोटिस भेजा, तो उन्होंने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और बॉन्ड भरने का आदेश दिया। इसके बावजूद, नेहा बोरा ने एसईएम कोर्ट में जाकर बॉन्ड भरने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि भारतीय संविधान उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है।
इसी प्रकार, बिहार में छात्रों के लिए प्रदर्शन करते हुए पुलिस ने प्रशांत किशोर को हिरासत में लिया। उन्हें गांधी मैदान से उठाया गया और थाने ले जाया गया। जब प्रशांत किशोर की जमानत का मामला अदालत में पहुंचा, तो अदालत ने सशर्त जमानत देने की बात कही और उन्हें भी बॉन्ड भरने को कहा। लेकिन प्रशांत किशोर ने इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि वे गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। अंततः, उन्हें बिना शर्त और बिना बॉन्ड भरे रिहा किया गया।