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राजोआणा के पत्र से भाजपा के सिख नेतृत्व की भूमिका का हुआ खुलासा: प्रो. ख्याला

भाजपा पंजाब के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने बलवंत सिंह राजोआणा के हालिया पत्र के संदर्भ में कहा है कि इस पत्र से भाजपा के सिख नेतृत्व की भूमिका की स्वीकार्यता स्पष्ट होती है। राजोआणा ने केंद्र सरकार के साथ संवाद में भाजपा के सिख नेताओं को महत्वपूर्ण माना है। पत्र में शिरोमणि अकाली दल और एसजीपीसी के प्रति असंतोष भी व्यक्त किया गया है। ख्याला ने बताया कि राजोआणा के मामले संवैधानिक और मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाए जाने चाहिए।
 

राजोआणा का पत्र और भाजपा का सिख नेतृत्व

अमृतसर - भाजपा पंजाब के प्रवक्ता और सिख विचारक प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने बताया कि बलवंत सिंह राजोआणा द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज को भेजे गए हालिया पत्र से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने केंद्र सरकार से संबंधित मामलों में भाजपा के सिख नेतृत्व की भूमिका को स्वीकार किया है।


उन्होंने कहा कि राजोआणा की अपील, जिसमें उन्होंने वर्ष 2019 की अधिसूचना और दया याचिका पर भाजपा के सिख नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा है, यह दर्शाती है कि वे केंद्र सरकार के साथ संवाद में भाजपा के सिख नेतृत्व को महत्वपूर्ण मानते हैं। पत्र में शिरोमणि अकाली दल और एसजीपीसी के प्रति राजोआणा की असंतोष भी दिखाई देता है, हालांकि आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।


प्रो. ख्याला ने यह भी कहा कि भाजपा श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और सभी सिख संस्थाओं का सम्मान करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजोआणा के पत्र पर निर्णय लेना पूरी तरह से श्री अकाल तख्त साहिब का अधिकार है और भाजपा इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती।


उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर भारत सरकार ने नौ सिख कैदियों से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। इसमें से छह कैदियों को रिहा किया जा चुका है, जबकि राजोआणा की मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद-72 के तहत लाया गया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष लंबित दया याचिका और न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर कोई भी सरकार एकतरफा निर्णय नहीं ले सकती।


प्रो. ख्याला ने यह भी कहा कि पंजाब के अशांत दौर से जुड़े कई बंदी सिंह दशकों से जेलों में हैं और उनके मामलों पर मानवीय आधार पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि राजोआणा ने कई बार स्पष्ट किया है कि उन्होंने न तो दया याचिका दायर करने की अनुमति दी थी और न ही किसी प्रकार की राहत की मांग की थी।


उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि राजोआणा जैसे संवेदनशील मामलों का समाधान संविधान, कानून और मानवीय दृष्टिकोण के अनुरूप होना चाहिए।