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राज्यसभा चुनाव में NDA की शानदार जीत: क्या महिला आरक्षण बिल पर होगी तेजी?

राज्यसभा की 37 सीटों के चुनाव में NDA ने शानदार जीत हासिल की है, जिससे उसकी स्थिति ऊपरी सदन में मजबूत हुई है। NDA ने 22 सीटें जीतीं, जबकि विपक्ष को 15 सीटें मिलीं। इस जीत से सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में आसानी होगी, खासकर महिला आरक्षण बिल पर। जानें इस चुनाव के परिणामों का क्या असर होगा और सरकार की आगे की रणनीति क्या है।
 

NDA की जीत से राज्यसभा में स्थिति मजबूत


नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न राज्यसभा की 37 सीटों के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल की है। इस जीत के साथ NDA की स्थिति ऊपरी सदन में पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।


चुनाव परिणामों के बाद NDA ने न केवल बहुमत का आंकड़ा पार किया है, बल्कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में भी आसानी हो गई है। वहीं, विपक्ष को सीमित सफलता मिली है, लेकिन कांग्रेस के लिए यह राहत की बात है कि नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी बरकरार रहेगी।


NDA ने 37 में से 22 सीटें जीतीं

राज्यसभा की कुल 37 सीटों में से 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें NDA को 13 सीटें मिलीं। इसके अलावा, जिन 11 सीटों पर मतदान हुआ, उनमें NDA ने 9 सीटों पर जीत हासिल की। इस प्रकार, गठबंधन ने कुल 22 सीटें जीतकर बढ़त बना ली, जबकि विपक्ष के हिस्से में 15 सीटें आईं।


NDA का दबदबा कई राज्यों में

NDA ने महाराष्ट्र की सात में से छह, बिहार की सभी पांच, और असम की तीनों सीटें जीतीं। इसके अतिरिक्त, ओडिशा की चार में से तीन, तमिलनाडु की पांच में से दो और पश्चिम बंगाल की पांच में से एक सीट पर भी NDA ने कब्जा जमाया। हरियाणा और छत्तीसगढ़ में भी NDA ने दो में से एक-एक सीट जीती।


राज्यसभा में NDA को मिला स्पष्ट बहुमत

इन चुनाव परिणामों का सीधा असर राज्यसभा की संख्या पर पड़ा है। NDA अब ऊपरी सदन में स्पष्ट बहुमत की स्थिति में आ गया है। बीजेपी पहले से 103 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल थी, और अब सहयोगियों के साथ मिलकर उसकी कुल ताकत 135 से अधिक हो गई है। इससे सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराना पहले से आसान होगा।


महिला आरक्षण बिल पर तेजी से हो सकती है प्रक्रिया

सरकार की नजर अब महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर है, जिसमें लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। यह कानून बन चुका है, लेकिन सरकार इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करना चाहती है।


इसके लिए मौजूदा सत्र में संविधान संशोधन बिल लाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार जनगणना और परिसीमन के कारण होने वाली देरी को टालने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है।


विपक्ष को साथ लेने की कोशिश

सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए विपक्षी दलों को भी साथ लेने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि कैबिनेट जल्द ही इस बिल को मंजूरी दे सकती है, जिसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा।


हालांकि, राज्यसभा के नए आंकड़े मॉनसून सत्र से प्रभावी होंगे, क्योंकि नए सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल के बाद शुरू होगा। NDA की इस बड़ी जीत से सरकार का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है।