×

राज्यसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में अंतर

राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, जिसमें दोनों दलों के चयन की प्रक्रिया में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने ऐसे चेहरे चुने हैं जो मीडिया में सक्रिय हैं, जबकि भाजपा ने संगठन में लंबे समय से कार्यरत लोगों को प्राथमिकता दी है। जानें किस प्रकार के उम्मीदवार दोनों पार्टियों ने चुने हैं और उनके चयन के पीछे की रणनीतियाँ क्या हैं।
 

राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, जिसमें दोनों दलों के चयन की प्रक्रिया में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। कांग्रेस की सूची में ऐसे चेहरे शामिल हैं जो पहले से ही मीडिया में सक्रिय हैं और राहुल गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी माने जाते हैं। इनमें से कई उम्मीदवारों का काम जमीन पर भी दिखता है। इसके विपरीत, भाजपा की सूची में अधिकतर ऐसे लोग हैं जो संगठन में लंबे समय से कार्यरत हैं और मीडिया में उनकी पहचान कम है। उदाहरण के लिए, भाजपा ने गुजरात से जिन चार उम्मीदवारों को नामित किया है, वे दिल्ली के प्रमुख मीडिया में अनजान हैं।


भाजपा ने मध्य प्रदेश से रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है, जो संगठन के लिए वर्षों से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे टिकट के लिए न तो दिल्ली गए थे और न ही प्रदेश कार्यालय में लॉबिंग की। इसी तरह, राजस्थान से सतीश पुनिया और अलका गुर्जर का भी यही हाल है। मणिपुर में पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी को टिकट दिया है। तरुण चुघ ऐसे नेता हैं जो मीडिया में दिखाई देते हैं, लेकिन उन्हें केवल इसी आधार पर टिकट नहीं मिला। दूसरी ओर, कांग्रेस ने पवन खेड़ा को टिकट दिया है, क्योंकि वे टीवी पर सक्रिय रहते हैं और असम के मुख्यमंत्री पर बिना सोचे-समझे आरोप लगाए थे, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ। इसके अलावा, मीनाक्षी नटराजन और नीरज दांगी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। प्रणब झा पर्दे के पीछे काम करते हैं, लेकिन उन्हें भी टिकट मिला क्योंकि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यालय में समन्वय का कार्य देखते हैं।