राम जन्मभूमि मंदिर में चोरी के आरोपियों का वकीलों ने किया बहिष्कार
अयोध्या में ऐतिहासिक निर्णय
अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसे की चोरी के मामले में अयोध्या के वकीलों ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से यह तय किया है कि कोई भी स्थानीय वकील इस शर्मनाक मामले में शामिल आठ आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा। यह निर्णय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। वर्तमान में सभी आठ नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और एसआईटी (SIT) की टीम उनसे लगातार पूछताछ कर रही है। आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है, जहां से जांच एजेंसियों को बड़ी मात्रा में नकद भी बरामद हुआ है।
आरोपियों की जीवनशैली में अचानक बदलाव
लग्जरी गाड़ियां और फार्महाउस
चढ़ावे की चोरी के मामले में एसआईटी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपियों की जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव आया था। जो परिवार पहले आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे, वे अब रातों-रात लग्जरी घरों, आलीशान फार्महाउस और महंगी गाड़ियों के मालिक बन गए। रामलला के खजाने की चोरी के पैसे से इनकी जीवनशैली में आया यह बदलाव पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ, जिसके बाद उनकी काली कमाई का पर्दाफाश होना शुरू हुआ।
मास्टरमाइंड की पहचान
दान गिनने वाले निकले मास्टरमाइंड
पुलिस की जांच में इस गबन का मुख्य मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्रा बताया गया है, जो दान में मिले पैसे को गिनने के लिए जिम्मेदार था। उसने अपने साले लवकुश मिश्रा को भी इस हेराफेरी में शामिल कर लिया। इसके अलावा, मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसे की गिनती करने वाली कोर टीम के सदस्य रमाशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे और स्थानीय निवासी अविनाश शुक्ला भी इस चोरी में शामिल थे। सबसे चौंकाने वाला नाम रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का है, जो चंपत राय का करीबी और पूर्व ड्राइवर रहा है। टिन्नू का मंदिर की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका थी और उसने अपने भतीजे मनीष यादव को दानपात्र प्रबंधन के काम पर लगाया था। इसके साथ ही, केनरा बैंक से रिटायर होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सुभाष श्रीवास्तव को भी पुलिस ने इस चोरी कांड में नामजद कर गिरफ्तार किया है।