रामपुर की CMO डॉ. दीपा सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप, लोकायुक्त में शिकायत दर्ज
रामपुर CMO पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
लखनऊ। रामपुर की मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉ. दीपा सिंह, पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया है। यह शिकायत गौतमबुद्धनगर के संजय कुमार द्वारा लोकायुक्त को की गई है। संजय ने आरोप लगाया है कि डॉ. सिंह के वित्तीय लेनदेन संदिग्ध हैं। उप लोकायुक्त ने पहले ही इस मामले में जांच शुरू कर दी है और डॉ. सिंह को तीन अगस्त तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है। 25 जून को उप लोकायुक्त सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि डॉ. सिंह को पहले 13 जून को जवाब देने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने तीन सप्ताह का समय मांगा था।
उप लोकायुक्त ने डॉ. सिंह को निर्देश दिया है कि वे आय से अधिक संपत्ति के आरोपों का खंडन करते हुए साक्ष्य और पिछले पांच वर्षों की आय-व्यय की गणना चार्ट के साथ प्रस्तुत करें। डॉ. दीपा सिंह ने पिछले वर्ष रामपुर में CMO का पद संभाला था। इससे पहले, वे बागपत में एससीएमओ थीं, जहां उन पर कई आरोप लगे थे। बागपत के जिलाधिकारी ने उनके निलंबन की सिफारिश की थी, लेकिन शासन ने उन्हें रामपुर में तैनात कर दिया। अब उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है।
लोकायुक्त अधिनियम के अंतर्गत शिकायत प्रस्तुत
शिकायतकर्ता संजय कुमार ने 28 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि डॉ. दीपा सिंह ने 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच लगभग 57,39,000 रुपये की वेतन आय प्राप्त की है। हालांकि, उन्होंने इस राशि का उचित उपयोग नहीं किया और विभिन्न खातों में धन का स्थानांतरण किया। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. सिंह ने लगभग 12,20,000 रुपये Yes Bank में और 26,00,000 रुपये Kshitija के खाते में स्थानांतरित किए हैं। इसके अलावा, उन्होंने SBI Life Insurance में लगभग 2,50,000 रुपये का निवेश किया है।
इस प्रकार, कुल मिलाकर लगभग 28,00,000 रुपये की राशि विभिन्न माध्यमों से स्थानांतरित की गई है, जबकि उनके खाते में लगभग 25,00,000 रुपये की राशि शेष है। यह स्पष्ट है कि डॉ. सिंह ने वेतन आय के अलावा अन्य स्रोतों से धन का उपयोग किया है, जिसका कोई स्पष्ट स्रोत नहीं है।
पंजाब नेशनल बैंक में 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच लगभग 21,72,000 रुपये की नकद जमा पाई गई है, जिसका कोई प्रमाणित स्रोत नहीं है। आरोप है कि डॉ. सिंह ने पिछले पांच वर्षों में गाजियाबाद में एक दुकान और एक फ्लैट, देहरादून में एक मकान और मेरठ में एक कोठी जैसी संपत्तियां इकट्ठा की हैं।
इस मामले में कई अन्य सीएमओ पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या इन अधिकारियों पर किसी की कृपा है, जो शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है।