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रामबचन राय बने बिहार विधान परिषद के नए सभापति, अवधेश नारायण सिंह ने दिया इस्तीफा

बिहार विधान परिषद में हाल ही में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, जिसमें अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर रामबचन राय को नया सभापति नियुक्त किया गया है। यह बदलाव जदयू के कोटे से किया गया है। अवधेश नारायण सिंह ने अपने इस्तीफे के पीछे सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था का हवाला दिया है। रामबचन राय ने नई जिम्मेदारी मिलने पर आभार व्यक्त किया है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
 

बिहार विधान परिषद में बदलाव

पटना। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद रामबचन राय को इस पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति जदयू के कोटे से की गई है। इस्तीफे से पहले, अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंप दिया है और भाजपा ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी थी, उसे उन्होंने अच्छे से निभाया। रामबचन राय के नए सभापति बनने पर उन्होंने खुशी व्यक्त की। नए सभापति रामबचन राय ने कहा कि वे जो भी कार्य सौंपा जाता है, उसे पूरी मेहनत से करते हैं और नई जिम्मेदारी मिलने पर आभार व्यक्त किया।


अवधेश नारायण सिंह का कार्यकाल

बीजेपी के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दिया। यह कदम उनकी पार्टी और सहयोगी जदयू के बीच सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है। विधान परिषद सचिवालय के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि अवधेश नारायण सिंह को जून 2024 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने जदयू के देवेश चंद्र ठाकुर की जगह ली थी, जिन्होंने लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद यह पद छोड़ा था।


अवधेश नारायण सिंह का राजनीतिक सफर

राज्य के पूर्व मंत्री अवधेश नारायण सिंह के नीतीश कुमार के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। नीतीश कुमार ने इस साल की शुरुआत में बीजेपी के सम्राट चौधरी के लिए रास्ता बनाने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। गया ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से कई बार MLC रहे अवधेश नारायण सिंह को पहली बार 2012 में उच्च सदन का सभापति चुना गया था और वे 2017 तक इस पद पर रहे। 2020 में वे फिर से इस पद पर आए, लेकिन दो साल बाद देवेश चंद्र ठाकुर के पद संभालने पर हट गए। NDA के सूत्रों के अनुसार, बीजेपी और जदयू के बीच एक समझौता हुआ है कि दोनों पार्टियों में से किसी एक के नेता को एक-एक सदन का प्रमुख बनाया जाएगा।