राहुल गांधी और ट्रंप: एक समान दृष्टिकोण की राजनीति
राहुल गांधी की राजनीतिक पृष्ठभूमि
राहुल गांधी उस राजनीतिक परंपरा से आते हैं, जो भारतीय संस्कृति के प्रति स्वाभिमान को नहीं, बल्कि पिछड़ेपन, उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का प्रतीक मानती है। मतदाता दशकों से ऐसे नेताओं को नकारते आ रहे हैं।
वैश्विक राजनीति में समानताएं
वर्तमान वैश्विक राजनीति में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राहुल गांधी जैसे दो व्यक्तित्वों के दृष्टिकोण में चौंकाने वाली समानताएं हैं। दोनों ही नेता बदलते भारत को लेकर असहज हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़कर आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी बात रख रहा है।
ट्रंप का दृष्टिकोण
ट्रंप का दृष्टिकोण केवल लेन-देन पर आधारित है, जबकि राहुल गांधी एक ऐसे राजनीतिक वंश का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पश्चिमी स्वीकृति को कूटनीतिक सफलता मानते हैं। ट्रंप द्वारा भारत को 'मृत अर्थव्यवस्था' कहना उनकी मानसिकता को दर्शाता है।
राहुल का ट्रंप के बयान का समर्थन
राहुल गांधी का ट्रंप के 'मृत अर्थव्यवस्था' बयान का समर्थन औपनिवेशिक मानसिकता का उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर 'नरेंद्र-सरेंडर' जैसी टिप्पणी की, जबकि भारत ने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया है।
लोकतंत्र में आलोचना का महत्व
लोकतंत्र में आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन जब कोई प्रमुख नेता बाहरी पूर्वाग्रहों को सत्य मानता है, तो यह चिंताजनक हो जाता है। राहुल गांधी का यह व्यवहार देश के खिलाफ बाहरी आरोपों को प्रामाणिक मानने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
संसद में राहुल का आचरण
हाल ही में, राहुल ने संसदीय नियमों का उल्लंघन करते हुए जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से उद्धरण देने का प्रयास किया। उन्होंने संसदीय परंपराओं का सम्मान करने के बजाय इसे व्यवधान का मुद्दा बना दिया।
राहुल की अराजकता
राहुल गांधी की अराजक शैली नई नहीं है। 2018 में प्रधानमंत्री को गले लगाने की घटना और केंद्रीय मंत्री का हाथ पकड़कर प्रेस वार्ता का प्रयास इसी मानसिकता का हिस्सा है।
विदेशों में दिए गए बयान
राहुल के विदेशों में दिए गए बयान अक्सर घरेलू राजनीति से परे जाकर देश के शत्रुओं के प्रचार का हथियार बन जाते हैं।
राहुल का विशेषाधिकार का भाव
क्या राहुल गांधी विशेषाधिकार की भावना से ग्रस्त हैं? क्या उन्हें लगता है कि केवल उन्हें ही 'लोक' और 'तंत्र' चलाने का अधिकार है? उनका यह चिंतन 2014 से पहले भी देखा गया था।
भारत की नई पहचान
भारत अब एक नई पहचान बना चुका है, जो आधारभूत संरचना के निर्माण, डिजिटल योजनाओं के विस्तार और रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण में अग्रणी है।
ट्रंप का प्रभाव
हालांकि ट्रंप का कार्यकाल सीमित है, लेकिन राहुल गांधी के गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्यों से देश को गंभीर नुकसान हो सकता है।