राहुल गांधी का गृह मंत्री को पत्र: छात्रों पर बल प्रयोग की मांग की जवाबदेही
नई दिल्ली में छात्रों के अधिकारों की रक्षा की अपील
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग की है। राहुल गांधी का कहना है कि छात्र केवल बेहतर और निष्पक्ष शिक्षा की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना कर दिया गया और उन पर बल प्रयोग किया गया।
गृह मंत्री से पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न
राहुल गांधी ने पत्र में गृह मंत्री से दो महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। पहला, क्या छात्रों के खिलाफ पेलेट गन जैसे घातक बल प्रयोग की अनुमति दी गई थी? दूसरा, यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं थी, तो यह आदेश किसने जारी किया?
छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया? pic.twitter.com/NDwfka1UqO
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 26, 2026
लाठियों से हमले करने वालों की पहचान
राहुल गांधी ने यह भी जानने की कोशिश की कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में छात्रों पर लाठियां बरसाते हुए लोग कौन थे। क्या वे पुलिसकर्मी थे या किसी अन्य एजेंसी से जुड़े लोग? उन्होंने यह भी पूछा कि उनकी तैनाती किसके निर्देश पर की गई थी।
छात्रों पर बल प्रयोग की चिंता
राहुल गांधी ने पत्र में लिखा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे थे। उनका कहना है कि छात्रों को निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा की आवश्यकता थी, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना कर दिया गया और उन पर कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए और कुछ महिला छात्रों के साथ दुर्व्यवहार की भी शिकायतें आई हैं।
घायल छात्र का उल्लेख
राहुल गांधी ने पत्र में हरियाणा के 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब का भी जिक्र किया, जो पेलेट गन से घायल हुआ है और उसकी एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है। उन्होंने कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर आई तस्वीरें इस घटना की गंभीरता को दर्शाती हैं।
लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा की अपील
राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतंत्र में नागरिकों का मूल अधिकार है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाले।
उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ हुई कथित हिंसा ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही, उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जवाबदेही तय की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।