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कांग्रेस के मुद्दों पर सहयोगी पार्टियों की चुप्पी पर सवाल

कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों की चुप्पी आरक्षण और जाति जनगणना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल खड़ा करती है। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इन मुद्दों को उठाया है, लेकिन समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियों की खामोशी चिंताजनक है। क्या यह चुप्पी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है? जानें इस लेख में।
 

कांग्रेस की अकेली लड़ाई

कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों की चुप्पी हैरान करने वाली है, चाहे वह आरक्षण पर बहस हो या जाति जनगणना के मुद्दे पर। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल, जो मंडल राजनीति से निकली हैं, भी इस पर मौन हैं। कुछ नेताओं के बयानों के अलावा, पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या अभियान की घोषणा नहीं की गई है। कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इन मुद्दों को उठाया है, लेकिन अन्य दलों की चुप्पी सवाल खड़ी करती है। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित उत्पीड़न के मामलों को विस्तार से बताया और खड़गे का भाषण भी साझा किया। यह स्पष्ट नहीं है कि दलित उत्पीड़न का मामला कांग्रेस के अध्यक्ष से जुड़ा है, इसलिए अन्य दलों की चुप्पी क्यों है।


राहुल गांधी और खड़गे ने प्रधानमंत्री को जाति जनगणना पर एक विस्तृत 21 पन्नों की चिट्ठी लिखी है, जिसमें ओबीसी की श्रेणी को शामिल करने और जातियों के लिए पूर्वनिर्धारित सूची मुहैया कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही, लंबी प्रश्नावली को रद्द करने का भी अनुरोध किया गया है, जिसमें आधार नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक खाता जैसी जानकारी मांगी जा रही है। ममता बनर्जी ने इस पर सवाल उठाए हैं, लेकिन अन्य विपक्षी नेता इस मुद्दे पर चुप हैं।


अखिलेश यादव चुनावों के मद्देनजर सावधानी से कदम उठा रहे हैं, ताकि किसी एक पक्ष में खड़े होने से बच सकें। तेजस्वी यादव या तो इस मुद्दे को समझ नहीं रहे हैं या चुनावी मौसम में राजनीति करने के लिए तैयार नहीं हैं। अरविंद केजरीवाल भी पंजाब चुनाव के कारण सतर्कता बरत रहे हैं।