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राहुल गांधी का भाजपा पर गंभीर आरोप: क्या चुनाव में हुई धांधली?

राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव में धांधली हुई है। उन्होंने हरियाणा की सरकार को 'घुसपैठिया' करार दिया और भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगाया। क्या सच में चुनाव में धांधली हुई है? जानें इस विवाद की पूरी कहानी और भाजपा की प्रतिक्रिया।
 

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया


पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया है, वहीं कांग्रेस इस परिणाम से निराश है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक पोस्ट साझा करते हुए भाजपा पर वोटों की चोरी का आरोप लगाया। उन्होंने हरियाणा की सरकार को भी 'घुसपैठिया' करार दिया।


राहुल गांधी का ट्वीट

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष होते, तो भाजपा 140 से अधिक सीटें नहीं जीत पाती। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर ट्वीट करते हुए लिखा, "वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार। लोकसभा के 240 भाजपा सांसदों में से, लगभग हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है। क्या उन्हें भाजपा की भाषा में 'घुसपैठिए' कहा जाए? और हरियाणा? वहां तो पूरी सरकार ही 'घुसपैठिया' है।"


चुनाव में धांधली का आरोप


राहुल गांधी ने आगे कहा, "जो संस्थाएं अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं - वो खुद 'remote controlled' हैं। उन्हें असली डर सच्चाई का है। क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएं, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।"


भाजपा पर गंभीर आरोप

मंगलवार को राहुल ने एक पोस्ट में भाजपा पर आरोप लगाया कि असम और बंगाल में चुनाव आयोग के सहयोग से भाजपा ने चुनाव में धांधली की है। उन्होंने ममता बनर्जी के इस दावे का समर्थन किया कि बंगाल में टीएमसी से 100 से अधिक सीटें चुराई गई हैं। राहुल गांधी ने कहा, "हम ममता जी से सहमत हैं। बंगाल में 100 से अधिक सीटें धांधली से जीती गईं। हमने पहले भी इस तरह की हरकतें देखी हैं मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, लोकसभा 2024 आदि। चुनाव में धांधली, संस्थाओं में धांधली, अब हमारे पास और क्या विकल्प बचा है?"


किरन रिजिजू की प्रतिक्रिया


भाजपा नेता किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कृपया जनता के जनादेश का सम्मान करना सीखें। आप संवैधानिक अधिकारियों पर जितना अधिक हमला करेंगे, नेता के रूप में आपकी बची-खुची विश्वसनीयता उतनी ही कम होती जाएगी। सरकार की नीतियों की आलोचना करें, हम पर हमले करें, लेकिन कृपया भारत के संविधान का सम्मान करें।"