×

राहुल गांधी का मोदी पर हमला: असहमति को देशद्रोह बताने का आरोप

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्तमान में शांतिपूर्ण विरोध को अपराध माना जा रहा है। उन्होंने असहमति को कुचलने और सवाल पूछने को साज़िश बताने की प्रवृत्ति की आलोचना की। राहुल ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे विभिन्न आंदोलनों को दबाया गया है। उनका कहना है कि लोकतंत्र की आत्मा असहमति में है और सरकार को आलोचना सुनने और जवाबदेह रहने की आवश्यकता है। जानें उनके बयान की पूरी कहानी।
 

राहुल गांधी का बयान

नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर तीखा हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आज भारत में एक 'Compromised PM' के शासन में शांतिपूर्ण विरोध को सबसे बड़ा 'अपराध' बना दिया गया है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को धीरे-धीरे ऐसी दिशा में धकेला जा रहा है, जहां असहमति को देशद्रोह और सवाल पूछने को साज़िश माना जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि सोचिए, चाहे मुद्दा कोई भी हो, यदि आप सत्ता के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तो लाठी, मुकदमा और जेल की संभावना लगभग निश्चित है। पेपर लीक से परेशान युवाओं ने अपने भविष्य के लिए आवाज उठाई, लेकिन उन्हें लाठियों से जवाब मिला। देश की प्रतिष्ठित महिला पहलवानों ने भाजपा के एक नेता पर गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया गया और उन्हें सड़कों से हटाया गया।

इंडिया गेट पर एक बलात्कार पीड़िता के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ, जिसे व्यवस्था ने 'असुविधा' मानकर समाप्त कर दिया। युवा कांग्रेस ने अमेरिका के व्यापार समझौते का शांतिपूर्ण विरोध किया, तो उन्हें 'देशविरोधी' करार देकर गिरफ्तार कर लिया गया। जब आम लोग जहरीली हवा के खिलाफ खड़े हुए, तो उनकी चिंता को भी 'राजनीति' कहकर दबा दिया गया। किसानों के अधिकारों के लिए आंदोलन करने पर उन्हें देशद्रोही कहा गया। आंसू गैस, रबर की गोलियां, पानी की बौछारें और लाठियां ही संवाद का माध्यम बन गए।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि जब आदिवासी अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए खड़े हुए, तो उन पर भी संदेह किया गया, मानो अपने अधिकार मांगना एक अपराध हो। यह कैसा लोकतंत्र है, जहां 'Compromised PM' सवालों से डरते हैं? जहां असहमति को कुचलना शासन का स्वभाव बनता जा रहा है? शांतिपूर्ण विरोध कोई अपराध नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। सवाल पूछना लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सरकार आलोचना सुनती है, जवाब देती है और जवाबदेह रहती है। मोदी जी, यह उत्तर कोरिया नहीं, भारत है। जब सत्ता खुद को राष्ट्र समझने लगे और असहमति को दुश्मन मानने लगे, तब लोकतंत्र मर जाता है।