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राहुल गांधी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए बयानों की समीक्षा

राहुल गांधी ने बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा चुनावों की तिथियां तय करती है। इसके अलावा, उन्होंने 'वोट चोरी' के आरोप भी लगाए। इस बीच, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम का क्या प्रभाव हो सकता है और राहुल गांधी की रणनीति पर क्या सवाल उठ रहे हैं।
 

बिहार में वोटर अधिकार यात्रा का प्रभाव

बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान मधुबनी में एक सभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निर्वाचन आयुक्तों का चयन करते हैं और चुनावों की तिथियां भाजपा द्वारा निर्धारित की जाती हैं, न कि निर्वाचन आयोग द्वारा।


राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि कुछ साल पहले अमित शाह ने यह दावा किया था कि भाजपा की सरकार 40-50 साल तक रहेगी। पहले यह बयान अजीब लगा, लेकिन अब इसकी सच्चाई सामने आ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमित शाह ऐसा इसलिए कह रहे थे क्योंकि भाजपा 'वोट चोरी' करती है।


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2023 में भाजपा ने एक नया कानून बनाया है, जिसके तहत निर्वाचन आयुक्तों पर कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। उनका सवाल था कि ऐसा कानून क्यों बनाया गया? उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य 'वोट चोरी' को बढ़ावा देना है।


राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि वोट का अधिकार छिन जाता है, तो लोगों को अन्य अधिकार नहीं मिल सकेंगे। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को एक वोट का अधिकार है, चाहे वह अम्बानी का बेटा हो या कोई गरीब युवा।


उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत हमले करना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) की शैली है, जिसने महात्मा गांधी के खिलाफ भी झूठ फैलाया था।


राहुल गांधी की बौखलाहट और चुनाव आयोग की स्थिति

राहुल गांधी का चुनावी व्यवस्था और चुनाव आयोग के प्रति भ्रम फैलाना उनकी बौखलाहट को दर्शाता है। सत्ता सुख में पले-बढ़े राहुल गांधी अब सत्ता से दूर होते जा रहे हैं। वे प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल से ऊपर खुद को मानते हैं और पुनः सत्ता में आने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।


बिहार में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण अंतिम चरण में है, और चुनाव आयोग ने कहा है कि अब तक किसी भी राष्ट्रीय राजनीतिक दल ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। आम मतदाताओं से 1 लाख 40 हजार से अधिक आपत्तियां आई हैं।


चुनाव आयोग ने मतदाताओं से पांच प्रश्न पूछे हैं, जिनमें मतदाता सूची की गहन जांच, मृत लोगों के नाम हटाने, और विदेशियों के नाम हटाने के सवाल शामिल हैं।


चुनाव आयोग ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है, फिर भी राहुल गांधी चुनावी व्यवस्था को चुनौती देते हुए झूठे आरोप लगा रहे हैं। इससे उनकी छवि और साख कमजोर हो रही है, जो कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकती है।


चुनाव आयोग की तैयारी

चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए 1 लाख 60 हजार से अधिक बूथ स्तर एजेंट तैनात किए हैं। आयोग के अनुसार, 99.11 प्रतिशत फार्म वापस मिल चुके हैं और 3 लाख 80 हजार नए मतदाताओं के आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनका निपटारा 31 अगस्त तक किया जाएगा।


राहुल गांधी की भविष्यवाणी

यदि राहुल गांधी इसी नकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते रहे, तो गृहमंत्री अमित शाह की भविष्यवाणी सच साबित हो सकती है।



-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक