राहुल गांधी की विदेश यात्रा ने राजनीतिक हलचल को बढ़ाया
राहुल गांधी की यात्रा में बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्णयों की तरह, कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी अपने कार्यों से सबको चौंकाने में पीछे नहीं हैं। हाल ही में, उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार के नेताओं को एक बार फिर आश्चर्यचकित किया है। 10 जुलाई को प्रयागराज में छात्रों से संवाद करने का उनका कार्यक्रम था, इसके बाद 11 जुलाई को बिहार में भी ऐसा ही एक कार्यक्रम निर्धारित था। लेकिन, बाद में इन दोनों कार्यक्रमों की तिथियों को आगे बढ़ा दिया गया। अब कहा जा रहा है कि राहुल गांधी 11 जुलाई को पटना में छात्रों से बातचीत करेंगे, लेकिन यह कार्यक्रम भी स्थगित हो गया।
जब प्रयागराज और पटना के कार्यक्रम नहीं हो सके, तो स्वाभाविक रूप से दिल्ली का कार्यक्रम भी टल गया। पहले इस यात्रा के स्थगन को लेकर कई अटकलें लगाई गईं, लेकिन अब यह स्पष्ट हुआ है कि राहुल गांधी एक निजी विदेश यात्रा पर गए हैं। यह यात्रा किसी विश्वविद्यालय या थिंक टैंक द्वारा भाषण देने के लिए नहीं है। जून में भी वे छुट्टियों पर गए थे। ऐसा प्रतीत होता है कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले वे फिर से छुट्टी पर चले गए हैं।
इस समय देश में कई राजनीतिक गतिविधियाँ चल रही हैं। छात्रों के मुद्दे पर कुछ राजनीतिक दल जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं, जबकि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी और प्रदेश कांग्रेस ने आंदोलन शुरू किया है। महंगाई और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के खिलाफ भी आम लोग विरोध कर रहे हैं। ऐसे में, नेता प्रतिपक्ष के रूप में छात्रों से संवाद का कार्यक्रम घोषित करने के बाद राहुल गांधी का विदेश जाना चर्चा का विषय बन गया है। इसी तरह, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी यूरोप में छुट्टियाँ मना रहे हैं।