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राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता के आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपों की जांच आवश्यक है। याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई थी, जिसमें राहुल गांधी पर विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके संभावित परिणाम।
 

कोर्ट का आदेश


लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता से संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपों की जांच आवश्यक है।


महत्वपूर्ण निर्णय

लखनऊ बेंच ने याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की जांच स्वयं करे या केंद्र सरकार की किसी एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी सौंपे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोहरी नागरिकता के आरोप गंभीर हैं और इनकी जांच की आवश्यकता है।


याचिका का विवरण

यह याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), सरकारी गोपनीयता कानून, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने और विस्तृत जांच की मांग की थी।


मामले की शुरुआत

शुरुआत में यह शिकायत रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी। बाद में, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 17 दिसंबर 2025 को मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया। 28 जनवरी 2026 को लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी।


अदालत ने कहा था कि नागरिकता जैसे मुद्दों पर निर्णय लेने का अधिकार उसके पास नहीं है। इस फैसले के खिलाफ विग्नेश शिशिर ने हाईकोर्ट में अपील की, जिस पर अब यह आदेश आया है।


राहुल गांधी पर आरोप

याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी दोहरी नागरिकता रखते हैं। उन्होंने कुछ दस्तावेजों और ईमेल्स का हवाला दिया है। हाईकोर्ट ने इन आरोपों को जांच योग्य माना है। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस या संबंधित एजेंसी मामले की जांच शुरू करेगी।


अगर जांच में आरोप सही पाए गए, तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। दोनों प्रमुख पार्टियों की प्रतिक्रिया भी इस पर आ सकती है। नागरिकता से जुड़े मामले हमेशा गंभीर होते हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। सभी पक्षों को कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए।