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राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने राष्ट्रपति से की मुलाकात, चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के 10 सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी का आरोप है। इस मुलाकात में कई विपक्षी नेता शामिल हुए, जिसमें प्रियंका गांधी वाड्रा और ममता बनर्जी भी थीं। जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और क्या कहा गया।
 

विपक्षी सांसदों की राष्ट्रपति से मुलाकात

नई दिल्ली। शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के 10 सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान, विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी का आरोप है। राष्ट्रपति से विपक्षी नेताओं की यह मुलाकात रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। पहले विपक्ष ने कहा था कि लगभग तीन सौ लोग राष्ट्रपति से मिलना चाहते हैं, लेकिन अंततः केवल कुछ नेताओं ने ही राष्ट्रपति से भेंट की।


इससे पहले, विपक्षी सांसद और अन्य नेता संसद भवन से मार्च करते हुए रायसीना हिल्स स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षाकर्मियों से बहस हो गई, जिसके बाद वे सांसदों के साथ विजय चौक पर धरने पर बैठ गईं। राहुल गांधी के साथ कई विपक्षी नेता इस मार्च में शामिल हुए, जिसमें ममता बनर्जी भी थीं। विपक्षी सांसदों ने ‘सेव डेमोक्रेसी’ का बैनर लेकर मार्च किया।


राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने से पहले, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में एक बैठक की। इस बैठक में राहुल गांधी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 14 अगस्त 1947 को दिया गया भाषण पढ़ा। उन्होंने कहा, ‘एक नई उम्मीद जन्म ले रही है और लंबे समय से संजोया गया सपना साकार हो रहा है। उम्मीद है कि यह सितारा कभी अस्त न हो और यह उम्मीद कभी निराश न हो।’


इससे पहले, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘हम आगे क्या कदम उठाएंगे, इसकी जानकारी आपको देंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। परसों तक हम अपने फैसले के मुताबिक आगे बढ़ते रहेंगे।’ उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन रोक दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है। लोकतांत्रिक देश में आंदोलन और जुलूस होते रहेंगे। सरकार को इन्हें उसी तरह संभालना चाहिए। लेकिन यह सरकार पूरी तरह तानाशाही तरीके से काम कर रही है।’