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राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, मानहानि मामले में बरी हुए

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई कथित टिप्पणी के मामले में बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। यह मामला 2018 में भाजपा नेता विजय मिश्रा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने आरोपों से इनकार किया और इसे राजनीतिक साजिश बताया। जानें इस मामले की पूरी पृष्ठभूमि और अदालत के फैसले के पीछे की कहानी।
 

राहुल गांधी को मिली राहत


नई दिल्ली: कांग्रेस के नेता और लोकसभा में विपक्ष के प्रमुख राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई कथित टिप्पणी के संबंध में मानहानि के मामले में बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए अदालत ने सोमवार को उन्हें इस मामले से बरी कर दिया। इस फैसले के समय राहुल गांधी अदालत में उपस्थित थे। यह मामला 2018 में भाजपा नेता विजय मिश्रा की शिकायत पर दर्ज किया गया था।


मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान शुरू हुआ। आरोप है कि राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह के खिलाफ ऐसी टिप्पणी की थी, जिसे मानहानिकारक माना गया। इसके बाद विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की। प्रारंभ में यह मामला सिविल कोर्ट में चला, लेकिन बाद में इसे एमपी-एमएलए अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।


मुकदमे की सुनवाई

सुनवाई के दौरान, अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को आरोपी मानते हुए समन जारी किया। इसके बाद, 20 फरवरी 2024 को वह सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए और अदालत ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत दी। राहुल गांधी ने आरोपों से इनकार करते हुए इसे सत्ता पक्ष की साजिश बताया।


गवाहों के बयान

मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने तीन गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें अनिल मिश्रा और रामचंद दुबे शामिल थे। विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के वॉइस सैंपल लेने की मांग की, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद सेशन कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी शिकायतकर्ता को राहत नहीं मिली।


अन्य मामलों में बरी हुए नेता

विशेष मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत में सांसदों और विधायकों से जुड़े कई मामलों में आरोप साबित नहीं हो सके हैं। पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह, विधायक विनोद सिंह, सीताराम वर्मा, और अन्य कई नेता भी संबंधित मामलों में बरी हो चुके हैं।