राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल, वोट चोरी के आरोप
राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला
नई दिल्ली। चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों के चलते उत्पन्न विवाद पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि मैं चुनाव आयोग और उनके अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं कि उनका कार्य गलत है। यह देश के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब समय आएगा, हम आपको पकड़ेंगे, और आप बच नहीं पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ एक अपराध है और यह हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इस कार्य में शामिल भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह किया है। इंसाफ अवश्य होगा।
Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.
The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason.
Justice will be served. pic.twitter.com/30kX06CBiH
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 23, 2026
इसके बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी एक प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग को पूरी तरह से हाइजैक कर लिया है। उन्होंने अपने सहयोगियों को भ्रमित किया है। आयोग का निर्णय अकेले कोई नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र नहीं हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और एसआईआर से संबंधित निर्णयों पर आपत्तियां दर्ज की हैं। इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी प्रक्रिया में उपयोग होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव, और मतदाता सूची के डेटाबेस के नियंत्रण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ निर्णयों और आदेशों पर सवाल उठाए, जिनकी जानकारी या सहमति नहीं ली गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
ओपी रावत का फॉर्म-6 में बदलाव पर बयान
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव करना गलत और गैरकानूनी है। रावत के अनुसार, यदि फॉर्म में बदलाव करना है, तो इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। रिपोर्ट में बताया गया कि विवेक जोशी ने मई में फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ी घोषणा जोड़ने पर आपत्ति जताई थी और इसे नियमों में बदलाव के बिना लागू करने पर सवाल उठाया था। बाद में संधू ने भी इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे तुरंत हटाने की बात कही थी।
मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर पर रावत के सवाल
ओपी रावत ने मतदाता सूची के डेटाबेस और उसके सॉफ्टवेयर के नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी क्षेत्र के अधिकारी किसी मतदाता सूची में बदलाव को सही मानें, लेकिन सॉफ्टवेयर उन्हें उस बदलाव को दर्ज करने की अनुमति न दे। रावत ने कहा कि सभी अधिकारों का केंद्रीकरण नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची के डेटाबेस के नियंत्रण में बदलाव को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन से भी संपर्क किया था। रावत ने कहा कि ऐसे घटनाक्रम से चुनाव आयोग पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
चुनाव आयोग का मतभेद के आरोपों पर बयान
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन घटनाक्रमों को औपचारिक असहमति के रूप में स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि एसआईआर समेत उसके सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। वहीं ओपी रावत ने कहा कि यदि दो चुनाव आयुक्तों ने किसी निर्णय पर लगातार आपत्तियां दर्ज की हैं, तो यह गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि दोनों आयुक्तों को कुछ निर्णय गलत लग रहे थे, तो उन्होंने पहले ही इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की। इस प्रकार राहुल गांधी और विपक्ष आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बता रहा है।