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राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- भाजपा की मदद के लिए किया गया बदलाव

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भाजपा की मदद के लिए ऑनलाइन फॉर्म-6 में अवैध बदलाव किए हैं। उन्होंने इस मामले में शामिल सभी व्यक्तियों को 'वोट चोरी' के लिए जिम्मेदार ठहराने की बात कही। इसके अलावा, उन्होंने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को साझा किया, जिसमें उच्चतम न्यायालय द्वारा फॉर्म-6 के उपयोग को लेकर निर्देश दिए गए थे। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है।
 

राहुल गांधी का आरोप


लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए अवैध और एकतरफा संशोधनों का आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाया है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोमवार को श्री गांधी ने कहा, "यह अब स्पष्ट हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए हैं, जो स्पष्ट रूप से भाजपा की सहायता के लिए किए गए हैं। यह उनके पद के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है। इस मामले में शामिल सभी व्यक्तियों को 'वोट चोरी' के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।"


उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के अपने आयुक्तों ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए अवैध बदलाव की पुष्टि की है। इसके साथ ही उन्होंने यह जानने की आवश्यकता जताई कि चुनाव आयोग में किसके निर्देश पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से यह बदलाव कराया गया। श्री गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार और इस मामले में शामिल सभी व्यक्तियों को लोकतंत्र पर किए गए इस कथित अपराध के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।


चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

श्री गांधी ने अपने पोस्ट में 26 सितंबर को चुनाव आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण भी साझा किया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर की अवधि के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि गैर-एसआईआर अवधि में नियमों के अनुसार लागू फॉर्म का उपयोग किया जाएगा।


यह ध्यान देने योग्य है कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर कोई एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि वह मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों और मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा लिए गए निर्णयों पर पहले चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सुनेगा।