राहुल गांधी ने मोदी की प्रेस ब्रीफिंग पर उठाए सवाल
राहुल गांधी की आलोचना
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नॉर्वे की एक पत्रकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछे गए सवाल के बाद उत्पन्न विवाद पर मोदी की कड़ी आलोचना की है। राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'जब दुनिया एक कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम को कुछ सवालों से घबराकर भागते हुए देखती है, तो भारत की छवि पर क्या असर पड़ता है। जब छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो डरने की भी कोई बात नहीं है।'
नॉर्वे में पत्रकार का सवाल
यह ध्यान देने योग्य है कि नॉर्वे में एक महिला पत्रकार, हेली लिंग, ने साझा प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा था। हालांकि, मोदी ने इसका कोई उत्तर दिए बिना वहां से चले गए। राहुल ने हेली की सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि मोदी का सवाल का जवाब न देना भारत की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
प्रेस ब्रीफिंग का संदर्भ
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के साथ एक साझा प्रेस ब्रीफिंग की थी। ब्रीफिंग के बाद, जब मोदी और जोनास गार वहां से जाने लगे, तब हेली लिंग ने पूछा, 'पीएम मोदी, आप दुनिया की सबसे आजाद प्रेस के कुछ सवालों का जवाब क्यों नहीं देते?' लेकिन प्रधानमंत्री ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया। हेली ने बाद में सोशल मीडिया पर इसका वीडियो साझा करते हुए लिखा कि 'नॉर्वे वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पहले स्थान पर है, जबकि भारत 157वें स्थान पर है।'
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
इसके बाद, भारतीय विदेश मंत्रालय ने 18 मई को हेली लिंग की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा कि भारतीय दूतावास प्रधानमंत्री के दौरे पर एक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित कर रहा है और वह वहां आकर अपने सवाल पूछ सकती हैं। हेली ने भारत में मानवाधिकार की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा, 'हम भारत पर भरोसा क्यों करें? क्या प्रधानमंत्री कभी भारतीय प्रेस के कठिन सवालों का जवाब देंगे?'
सिबी जॉर्ज का बयान
विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने इन सवालों का जवाब देने के बजाय भारत की पांच हजार साल की सभ्यता और संप्रभुता का हवाला दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कोविड महामारी के दौरान अन्य देशों की मदद की और वैक्सीन प्रदान की। हेली लिंग ने बाद में सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने मानवाधिकार और भारत पर भरोसे से जुड़े सवाल पूछे थे, लेकिन उन्हें सीधे जवाब नहीं मिले।