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रूस और चीन के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग: भारत के लिए चिंता का विषय

रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। हाल ही में, चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले का दौरा किया, जहां उन्होंने कई सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया। इस दौरे का उद्देश्य सैन्य पारदर्शिता और सीमा पर विश्वास को बढ़ाना था। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग आपसी समझ पर आधारित है। भारत, जो लंबे समय से रूस पर अपनी रक्षा जरूरतों के लिए निर्भर है, को इस बढ़ते सहयोग से चिंता हो सकती है।
 

रूस और चीन का सैन्य सहयोग

रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो भारत के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। हाल ही में, भारत में रूस का चौथा S400 रेजीमेंट का पहला खेप पहुंचा है। इसी बीच, रूसी मीडिया ने बताया कि इस सप्ताह चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की एक निरीक्षण टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले का दौरा किया। इस दौरे के दौरान, टीम ने कई सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया, जिसमें एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यह क्षेत्र रूस के पूर्वी हिस्से में आता है, जो रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह निरीक्षण 1990 के दशक में स्थापित बॉर्डर ट्रस्ट बिल्डिंग मैकेनिज्म के तहत किया गया था।


सैन्य पारदर्शिता और सहयोग

रूस और चीन के बीच 1996 और 1997 में हुए समझौतों के तहत यह निरीक्षण प्रणाली लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य सैन्य पारदर्शिता और सीमा पर विश्वास को बढ़ाना था। बाद में, यह ढांचा शंघाई फाइव और फिर शंघाई सहयोग संगठन के रूप में विकसित हुआ। रूसी समाचार एजेंसी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान चीनी प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि रूस ने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया है और पारदर्शिता के मानकों को बनाए रखा है। चीनी सैन्य अधिकारियों ने रूस की लॉजिस्टिक्स और सिस्टम की भी सराहना की।


भविष्य की संभावनाएं

रिपोर्टों के अनुसार, चीनी टीम के अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग आपसी समझ और विश्वास पर आधारित है, जिसे आगे बढ़ाने की योजना है। इस दौरान, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन को रूस का स्वाभाविक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह आपसी हितों पर आधारित है। हालांकि, इस दौरे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि रूस ने जिस एयर डिफेंस यूनिट का निरीक्षण कराया, उसके बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं की गई। इससे यह सवाल उठता है कि क्या दोनों देश अपने सैन्य सिस्टम को और निकट ला रहे हैं।


भारत की रक्षा जरूरतें

पिछले कुछ वर्षों में, रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग में तेजी आई है। दोनों देशों ने कई संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए हैं, और रूसी राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि रूस और चीन के रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं। भारत लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहा है। आज भी, भारतीय सेना के बड़े हिस्से में उपयोग होने वाले हथियार और सिस्टम रूस या पूर्व सोवियत संघ से आए हैं। अनुमान के अनुसार, भारत के लगभग आधे से अधिक सैन्य प्लेटफार्म किसी न किसी रूप में रूसी तकनीक से जुड़े हैं, जिसमें एयर डिफेंस सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण है। भारत के पास मौजूद S400 मिसाइल सिस्टम, इग्ला एस मैनपड्स और पुराने पैचोरा जैसे सिस्टम रूस की तकनीक पर आधारित हैं। ऐसे में, यदि रूस और चीन के बीच सैन्य तकनीक और सिस्टम का आदान-प्रदान बढ़ता है, तो यह भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है।