रूस के संसदीय चुनाव: यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया पर विवाद
रूस के संसदीय चुनाव में नया मोड़
रूस के संसदीय चुनाव में पहली बार उन क्षेत्रों के निवासी भी शामिल हो रहे हैं, जिन्हें मॉस्को ने यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अपने नियंत्रण में लिया था। यह कदम राष्ट्रपति क्रेमलिन द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों में अपनी पकड़ को मजबूत करने के प्रयास का हिस्सा है। कीव के अधिकारियों ने इस प्रक्रिया की तीखी आलोचना करते हुए इसे अवैध करार दिया है।
मतदान की प्रक्रिया और मानवाधिकार चिंताएँ
एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन क्षेत्रों के निवासियों को चुनाव में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मतदान की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होकर रविवार तक चलेगी, जिसका उद्देश्य मतदान प्रतिशत को बढ़ाना है।
मतदान की शुरुआत और सुरक्षा कारण
हालांकि, यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों और रूस की सीमा से लगे कुछ इलाकों में मतदान पिछले महीने के अंत से ही शुरू हो चुका था। अधिकारियों ने इस लंबी प्रक्रिया के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में 35 लाख से अधिक मतदाता हैं।
नए क्षेत्रों का राजनीतिक महत्व
मॉस्को के अधिकारी अक्सर इन क्षेत्रों को 'नए क्षेत्र' के रूप में संदर्भित करते हैं। रूस ने सितंबर 2022 में इन क्षेत्रों को अपने में मिला लिया था, जबकि उस समय ये पूरी तरह से उसके नियंत्रण में नहीं थे। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है।
मतदान केंद्रों पर सुरक्षा की स्थिति
दोनेत्स्क क्षेत्र के रूस के कब्जे वाले हिस्से में एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं ने अपने मत डाले, जबकि पास में एक रूसी सैनिक हथियार लेकर खड़ा था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन क्षेत्रों में मतदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ये निवासी 'रूस के साथ पुन:एकीकरण के बाद पहली बार' ड्यूमा के लिए मतदान कर रहे हैं।
युद्ध के दौरान मतदान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पुतिन ने यह भी कहा कि युद्ध में शामिल रूसी सैनिक भी मतदान करेंगे। काला सागर में स्थित क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है, जिसे मॉस्को ने 2014 में अपने नियंत्रण में लिया था। स्टेट ड्यूमा के लिए यह चुनाव क्रेमलिन के राजनीतिक प्रभुत्व को मजबूत करने और युद्ध के लिए जनता के समर्थन को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है।
कीव की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
कीव के अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में हो रहे मतदान को अवैध बताया और विदेशी सरकारों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों से चुनाव को मान्यता नहीं देने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि मतदान में भाग लेने पर लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगांद ने कहा कि रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान 'अंतरराष्ट्रीय कानून का एक और खुला उल्लंघन' है।
यूरोपीय संघ की स्थिति
उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ इन तथाकथित चुनावों के आयोजन और उनके परिणामों को न तो मान्यता देता है और न कभी देगा।