रूस ने पीएम मोदी के दौरे का किया ऐलान, भारत के साथ मजबूत संबंधों का संकेत
रूस ने पीएम मोदी के 2026 में संभावित दौरे की घोषणा की है, जो भारत और रूस के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा। इस दौरे का उद्देश्य नई डील्स पर चर्चा करना है, जिसमें न्यूक्लियर और हथियारों के क्षेत्र में सहयोग शामिल है। यह बयान तब आया है जब भारत ने एक बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया, जिसमें कई विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
Mar 24, 2026, 11:30 IST
रूस का बड़ा ऐलान
अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर तनाव के बीच, रूस ने प्रधानमंत्री मोदी के संभावित दौरे की घोषणा की है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बात की पुष्टि की है कि पीएम मोदी का रूस दौरा 2026 में संभव है। लावरोव ने 'भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर' शीर्षक वाले सम्मेलन में वर्चुअली भाग लेते हुए कहा कि हम 2026 में प्रधानमंत्री मोदी के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपने विचार साझा किए। यह रूस का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत है। मार्च 2026 में, जब भारत ने उत्तर-पूर्व में सुरक्षा चुनौतियों का समाधान किया होगा, तब यह दौरा होगा। लावरोव ने कहा कि हम पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए तैयार हैं।
बयान की पृष्ठभूमि
इस बयान का महत्व समझना आवश्यक है। पहले, अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के दौरान भारत पर रूसी तेल खरीदने पर टैरिफ लगाया गया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। भारत की 35% से अधिक ऊर्जा जरूरतें रूस के तेल पर निर्भर हैं। पुतिन ने दिसंबर 2025 में भारत में ईंधन शिपमेंट का बड़ा वादा किया था। लावरोव ने कहा कि यदि पीएम मोदी आते हैं, तो नई डील्स पर चर्चा होगी, जिसमें न्यूक्लियर, मून मिशन और हथियारों के क्षेत्र में सहयोग शामिल होगा। भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और रूस के साथ संयुक्त उत्पादन की इच्छा रखता है। यूक्रेन युद्ध में भारत ने तटस्थता बनाए रखी है और रूस को कभी भी अलग नहीं किया।
भारत में आतंकवाद विरोधी अभियान
यह बयान तब आया है जब भारत के एनआईए ने एक बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया। 13 मार्च की रात को, दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता के एयरपोर्ट पर छापेमारी की गई, जिसमें सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। ये लोग भारत में टूरिस्ट वीजा पर आए थे, लेकिन उनका असली मकसद भारत के खिलाफ साजिश रचना था। एनआईए के अनुसार, ये लोग मिजोरम में बिना अनुमति के घुसे और वहां से म्यांमार में प्रवेश किया। म्यांमार में, इन्होंने जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण दिया, जो म्यांमार की सेना के खिलाफ लड़ाई कर रहे हैं।