रूस ने पेट्रोल निर्यात पर लगाया प्रतिबंध, वैश्विक तेल बाजार में हलचल
रूस का पेट्रोल निर्यात प्रतिबंध
रूस का निर्णय: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते, रूस ने अपने पेट्रोल निर्यात पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने और आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। रूसी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, यह प्रतिबंध छह महीने के लिए लागू रहेगा, ताकि रिफाइनरियों की देखभाल और घरेलू मांग को पूरा किया जा सके।
प्रतिबंध के कारण:
रिफाइनरी पर हमले:
यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष के कारण कई प्रमुख रूसी रिफाइनरियों को ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है, जिससे उत्पादन में कमी आई है।
ईरान युद्ध का प्रभाव:
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल मार्ग, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य, खतरे में हैं। रूस नहीं चाहता कि वैश्विक संकट के समय उसके देश में ईंधन की कमी हो।
खेती का मौसम:
रूस में वसंत के दौरान कृषि कार्य बढ़ जाता है, जिसके लिए डीजल और पेट्रोल की भारी मात्रा की आवश्यकता होती है।
वैश्विक बाजार पर प्रभाव:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $90 प्रति बैरल के पार जाने की संभावना है। यूरोप ने रूसी तेल पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन वैश्विक आपूर्ति में कमी के कारण यूरोप में भी पेट्रोल की कीमतें बढ़ सकती हैं। तेल के जहाजों को अब लंबे और महंगे मार्गों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है।
भारत पर प्रभाव:
भारत, जो अपनी आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा रूस से रियायती दरों पर आयात करता है, इस निर्णय से प्रभावित हो सकता है। हालांकि, यह प्रतिबंध मुख्य रूप से 'परिष्कृत पेट्रोल' पर है, लेकिन कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना है। भारत मुख्य रूप से कच्चा तेल रूस से खरीदता है, इसलिए तत्काल कोई गंभीर संकट नहीं है। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और सामान्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है।