☰
×

रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी में सेंसरशिप का मामला: इतिहास की पुनरावृत्ति

हाल ही में, रेहान वाड्रा की तस्वीरों की प्रदर्शनी को सेंसर कर दिया गया, जो इंदिरा गांधी के समय की सेंसरशिप की याद दिलाती है। इस प्रदर्शनी में शामिल तस्वीरों को हटाने के बाद, आयोजकों ने खाली फ्रेम छोड़ दिए, जो इतिहास के दोहराव को दर्शाते हैं। जानें इस दिलचस्प घटनाक्रम के बारे में और कैसे यह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
 

प्रदर्शनी में सेंसरशिप का घटनाक्रम

इतिहास के दोहराव की घटनाएँ इन दिनों हर जगह देखी जा रही हैं। इमरजेंसी की चर्चा के बीच, इंदिरा गांधी के पोते रेहान राजीव वाड्रा की तस्वीरों की प्रदर्शनी को सेंसर कर दिया गया है। यह घटना उस समय की याद दिलाती है जब अखबारों को सेंसर किया जाता था, जैसे कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने उस समय के खिलाफ उठाए गए कदमों को दर्शाया था। यदि यह सेंसरशिप नहीं होती, तो शायद इस प्रदर्शनी के बारे में केवल कुछ कांग्रेस नेताओं को ही जानकारी होती। लेकिन अब यह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।


रेहान वाड्रा एक फोटोग्राफर हैं और उनकी प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित की गई थी, जिसमें एक सौ से अधिक तस्वीरें शामिल थीं। इनमें से कई तस्वीरें हाल के प्रदर्शनों की थीं, जिन्हें बीकानेर हाउस प्रशासन ने हटाने का आदेश दिया। आयोजकों ने हटाने के लिए कहे गए चित्रों को तो हटा दिया, लेकिन वहां खाली फ्रेम छोड़ दिए। यह वही तरीका है जो इंदिरा गांधी के समय में अपनाया जाता था, जब सेंसरशिप के तहत समाचारों के स्थान को खाली छोड़ दिया जाता था। रेहान ने भी यही किया, लेकिन प्रशासन ने खाली फ्रेम पर भी आपत्ति जताई।