लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली - पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव की कानूनी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 'लैंड फॉर जॉब' घोटाले में उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
याचिका का विवरण
लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई द्वारा दायर एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने की। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद, याचिका को खारिज कर दिया गया।
निचली अदालत में राहत
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही के दौरान लालू यादव को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी है। आदेश में कहा गया है, 'याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी जाती है।'
दिल्ली हाई कोर्ट का निर्णय
पिछले महीने, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी लालू प्रसाद यादव की याचिका को खारिज कर दिया था। उन्होंने अदालत में यह तर्क दिया था कि सीबीआई ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली है, इसलिए मामला निरस्त किया जाना चाहिए। लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है।
घोटाले का विवरण
यह 'लैंड फॉर जॉब' मामला उन आरोपों से संबंधित है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए, लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रेलवे में नियुक्तियाँ कीं, जिसके बदले में उनके परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़े संस्थाओं को जमीन के टुकड़े दिए गए।
सीबीआई के अनुसार, उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों ने कथित तौर पर बाजार दर से कम कीमतों पर जमीन हस्तांतरित की, जो विभिन्न रेलवे जोन में नौकरियों के बदले में दी गई थी। हालांकि, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्य इन आरोपों से इनकार करते हैं और खुद को निर्दोष बताते हैं।