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लाहौर को 2026-27 के लिए एससीओ की सांस्कृतिक राजधानी घोषित किया गया

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने पाकिस्तान के लाहौर को 2026-27 के लिए 'पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी' के रूप में मान्यता दी है। यह निर्णय किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एससीओ के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में लिया गया। इस पहल का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा देना है। जानें इस महत्वपूर्ण घोषणा के पीछे की कहानी और लाहौर के लिए इसका क्या अर्थ है।
 

लाहौर का नया मान

इस्लामाबाद, 2 सितंबर: शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने पाकिस्तान के लाहौर को 2026-27 के लिए 'पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी' के रूप में मान्यता दी है। यह महत्वपूर्ण घोषणा किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एससीओ के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की 26वीं बैठक में की गई, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी उपस्थित थे।


समाचार पत्र 'डॉन' के अनुसार, 2022 से हर वर्ष एससीओ के सदस्य देशों के शहरों को बारी-बारी से यह दर्जा दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह उस देश की सांस्कृतिक धरोहर को भी उजागर करता है, जो संगठन का वर्तमान अध्यक्ष होता है।


पाकिस्तान ने इस वर्ष एससीओ की अध्यक्षता ग्रहण की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस अध्यक्षता की थीम 'दृष्टिकोण को कार्य में बदलना: संपर्क, नवाचार और साझा समृद्धि' निर्धारित की है। अप्रैल में बिश्केक में एससीओ सदस्य देशों के पर्यटन विभागों के प्रमुखों की बैठक में लाहौर को यह दर्जा देने का निर्णय लिया गया।


पहले जिन शहरों को यह मान्यता प्राप्त हुई है, उनमें भारत का वाराणसी (2022-23), कजाकिस्तान का अल्माटी (2023-24), चीन का किंगदाओ (2024-25) और किर्गिस्तान का चोलपोन-अता (2025-26) शामिल हैं। एससीओ, जो 2001 में स्थापित हुआ था, इस वर्ष अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसका मुख्यालय बीजिंग में स्थित है। इसमें भारत सहित 10 सदस्य देश शामिल हैं।


यह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की अध्यक्षता में बिश्केक में आयोजित किया गया था।