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लूला डा सिल्वा ने 80 वर्ष की आयु में ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की

ब्राजील के वामपंथी नेता लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने 80 वर्ष की आयु में चौथी बार राष्ट्रपति बनने की दिशा में महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। उन्होंने फ्लावियो बोल्सोनारो को चुनाव में हराया, जिसमें महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। लूला का राजनीतिक सफर ट्रेड यूनियन नेता के रूप में शुरू हुआ था और उन्होंने वर्कर्स पार्टी की स्थापना की। उनकी विदेश नीति में ब्राजील की स्वतंत्र भूमिका और विकासशील देशों के साथ सहयोग पर जोर दिया गया है। जानें इस चुनाव के परिणाम और लूला की योजनाएं।
 

ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक जीत

ब्रासीलिया: ब्राजील की राजनीति में वामपंथी नेता लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की हालिया जीत को एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। 80 वर्ष की आयु में चौथी बार राष्ट्रपति बनने की संभावना के साथ, उन्होंने चुनावी मुकाबले में फ्लावियो बोल्सोनारो को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, चुनाव परिणामों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।


आंकड़ों के अनुसार, जब 99.97 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी हुई, तब लूला को 51.76 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बोल्सोनारो को 48.24 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार, दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला बेहद निकट रहा।


लूला, जो एक पूर्व फैक्ट्री कर्मचारी हैं, ने 1970 के दशक में ट्रेड यूनियन नेता के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। उन्होंने वर्कर्स पार्टी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 2002 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर सत्ता में आए।


उन्होंने 2006 में पुनः चुनाव जीतकर 2010 तक राष्ट्रपति पद पर कार्य किया। उनके बाद डिल्मा रूसेफ ने राष्ट्रपति का पद संभाला। लूला के राजनीतिक जीवन में भ्रष्टाचार के मामलों ने भी काफी विवाद उत्पन्न किया, जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन बाद में उनकी दोषसिद्धि के फैसले रद्द कर दिए गए।


इस चुनाव में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्त कार्रवाई और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने का वादा किया, जबकि लूला ने सामाजिक कल्याण, राष्ट्रीय संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया। दोनों पक्षों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रहे।


लूला की विदेश नीति में ब्राजील की स्वतंत्र भूमिका, विकासशील देशों के साथ सहयोग और चीन के साथ मजबूत संबंधों को महत्व दिया गया है। उनके नेतृत्व में ब्राजील की वैश्विक कूटनीति और लैटिन अमेरिका में उसकी भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होती रही है।


लूला फरवरी में भारत भी आए थे, जहां उन्होंने दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में भाग लिया। नई दिल्ली हवाई अड्डे पर उनका स्वागत विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने किया था।