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लोकसभा में परिसीमन बिल 2026 का विरोध, सपा ने उठाए सवाल

लोकसभा के विशेष सत्र में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन बिल 2026 पेश किया, जिसका विपक्ष ने कड़ा विरोध किया। समाजवादी पार्टी ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल पर सवाल उठाते हुए सरकार की जल्दबाजी पर चिंता जताई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना के कार्य की प्रगति पर जानकारी दी और धर्म के आधार पर आरक्षण पर बहस की। जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और क्या कहा गया।
 

परिसीमन बिल का प्रस्तुतिकरण

गुरुवार को लोकसभा के विशेष सत्र में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन बिल, 2026 पेश किया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण करना, विधानसभा सीटों की संख्या निर्धारित करना और चुनावी क्षेत्रों में राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों का विभाजन करना है। 


विपक्ष का विरोध

जैसे ही यह बिल सदन में प्रस्तुत हुआ, विपक्ष ने इसका तीव्र विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने पहले विरोध जताया, जिसके बाद सदन में हंगामा मच गया। सत्र की शुरुआत में सदन ने प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया।


समाजवादी पार्टी का कड़ा रुख

समाजवादी पार्टी ने भी परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि संसद को संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन यह विधेयक संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना से इसे अलग करना गलत है और इससे संवैधानिक ढांचे पर असर पड़ेगा।


महिलाओं के हित में सपा की मांग

धर्मेंद्र यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा महिलाओं के हित में आगे रही है और सरकार से अनुरोध किया कि इस संविधान संशोधन और परिसीमन बिल को वापस लिया जाए।


अखिलेश यादव का सवाल

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए सरकार से सवाल किया कि इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार जनगणना क्यों नहीं करा रही है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर दिया कि जनगणना का कार्य प्रारंभ हो चुका है।


अमित शाह का स्पष्टीकरण

अमित शाह ने धर्मेंद्र यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे यह कह रहे हैं कि इसमें कॉलम नहीं है, जबकि उन्हें समझना चाहिए कि फिलहाल घरों की गिनती हो रही है, न कि जाति की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को मौका मिले, तो वह घरों की जाति भी तय कर दे।


धर्म के आधार पर आरक्षण पर बहस

केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र यादव द्वारा मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की बात करना असंवैधानिक है, क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं है।


अखिलेश यादव का जवाब

इस पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं। इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे तो अपनी सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।