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लोकसभा में हंगामे के बीच पीएम मोदी का भाषण न होना, टीएमसी सांसद ने उठाए सवाल

लोकसभा में बुधवार को हंगामे के चलते पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण नहीं हो सका, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपनी महिला सांसदों का उपयोग कर पीएम मोदी के खिलाफ अप्रिय घटना की योजना बना रही थी। इस पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के '56 इंच के सीने' के दावे पर सवाल उठाए। स्पीकर ओम बिरला ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई और सांसदों से संयम बरतने की अपील की। जानें इस घटनाक्रम के सभी पहलू।
 

संसद में हंगामा और पीएम मोदी का भाषण

संसद में गतिरोध: बुधवार को लोकसभा में हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण नहीं हो सका, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। भाजपा के कुछ नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस अपनी महिला सांसदों का उपयोग कर पीएम मोदी के खिलाफ किसी अप्रिय घटना को अंजाम देना चाहती थी। लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि यदि उस दिन कोई अप्रिय घटना होती, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होता। इस पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी।


महुआ मोइत्रा ने बिरला की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'पीएम मोदी को किस बात का डर है? वह '56 इंच के सीने' का दावा करते हैं। चार महिलाएं उनके पास गईं, उनके हाथ में केवल एक फ्लेक्स बैनर था, कोई हथियार नहीं था। वह डर के मारे पीछे हट गए। उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं था और उन्होंने बिरला जी को यह सब कहने के लिए भेजा है। वह किसी को बेवकूफ नहीं बना रहे हैं।'




स्पीकर ओम बिरला का बयान

लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि यदि उस दिन कोई अप्रिय घटना होती, तो यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होता। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंच है और यहां इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने सभी सांसदों से संयम बरतने और संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की अपील की।


स्पीकर ने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जवाब देने वाले थे, तब कांग्रेस के कुछ सदस्य अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं। संभावित स्थिति को भांपते हुए, उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया। यह निर्णय पूरी तरह एहतियात के तौर पर लिया गया था ताकि हालात बिगड़ने से पहले ही उन्हें नियंत्रित किया जा सके। अंत में, उन्होंने कहा कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।