विदेश मंत्री जयशंकर की यूएई यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
जयशंकर और शेख अब्दुल्ला की मुलाकात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की, जिसमें उन्होंने द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने इस बैठक को ‘‘सौहार्दपूर्ण और सार्थक’’ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं ने ‘‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना के अनुरूप’’ विचार-विमर्श किया। जयशंकर बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर यूएई पहुंचे थे, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करना था।
भारत और यूएई ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाया है। मई 2022 में लागू हुआ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। जयशंकर ने इससे पहले बुधवार को ‘रायसीना मिडिल ईस्ट’ कार्यक्रम के दूसरे संस्करण में भाग लिया।
इस दौरान, उन्होंने शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ ‘आगे की दुनिया: शक्ति, उद्देश्य और संभावनाएं’ विषय पर चर्चा की। शेख अब्दुल्ला यूएई के उप प्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने अबू धाबी में जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोचोरिश्विली से भी मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर विचार किया।
पिछले महीने, जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जायद अल नाहयान और फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो से मुलाकात की थी। इस बैठक में आपसी हित के क्षेत्रों में त्रिपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की गई।
इससे पहले, जयशंकर ने अप्रैल में यूएई का दौरा किया था, जहां उन्होंने जायद अल नाहयान से क्षेत्र में बदलती स्थिति और उसके प्रभावों पर चर्चा की थी। यूएई भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय निवास करते हैं।
यह देश ऊर्जा आपूर्ति और निवेश का एक प्रमुख स्रोत भी है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, प्रवासी भारतीय समुदाय यूएई का सबसे बड़ा जातीय समुदाय है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 35 प्रतिशत है। वर्ष 2024 में यूएई में भारतीय नागरिकों की संख्या लगभग 43 लाख होने का अनुमान है।
प्रवासी भारतीय समुदाय के लगभग 15 प्रतिशत लोग अबू धाबी अमीरात में रहते हैं, जबकि शेष छह अमीरातों, जिनमें दुबई भी शामिल है, में बसे हुए हैं।