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विदेश मंत्री जयशंकर ने बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अबू धाबी में 'रायसीना डायलॉग' में बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देशों के छोटे समूहों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की बात की और भारत-यूएई के बीच मजबूत साझेदारी का उदाहरण दिया। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की गति तेजी से बढ़ रही है, और इसके लिए नई साझेदारियों की आवश्यकता है। उन्होंने द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा की और प्रवासी भारतीयों की संख्या पर प्रकाश डाला।
 

जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में अबू धाबी में आयोजित 'रायसीना डायलॉग' के पश्चिम एशिया संस्करण में बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशों के छोटे समूहों के बीच सहयोग बढ़ाकर इस दिशा में प्रगति की जा सकती है।


जयशंकर ने 'भविष्य की दुनिया: शक्ति, उद्देश्य और संभावनाएं' विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की गति तेजी से बढ़ रही है, जो लंबे समय से चल रहे रुझानों और अचानक घटित घटनाओं का परिणाम है।


नई साझेदारियों की आवश्यकता

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस प्रक्रिया में नई साझेदारियों और विकल्पों की खोज स्वाभाविक है। इसके लिए देशों को अपने पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर अपनी रणनीतिक सोच को विकसित करना होगा।


जयशंकर ने कहा, 'बहुपक्षवाद में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।' उन्होंने 'मिनीलैटरलिज्म' के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो कुछ विशेष मुद्दों पर सीमित देशों के समूहों के बीच सहयोग को दर्शाता है।


भारत-यूएई संबंध

जयशंकर ने पिछले एक दशक में भारत और यूएई के बीच मजबूत साझेदारी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि दोनों देश बदलते वैश्विक माहौल के अनुसार कैसे कदम उठा रहे हैं।


उन्होंने शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय बैठक को 'सौहार्दपूर्ण और सार्थक' बताया, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर विचारों का आदान-प्रदान किया।


व्यापार और निवेश में वृद्धि

भारत और यूएई ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। मई 2022 में लागू हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) ने दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा दिया है।


यूएई खाड़ी क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारतीय प्रवासी समुदाय यूएई में सबसे बड़ा जातीय समुदाय है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 35 प्रतिशत है।


प्रवासी भारतीयों का योगदान

यूएई में लगभग 15 प्रतिशत प्रवासी भारतीय अबू धाबी में रहते हैं, जबकि अन्य दुबई और अन्य अमीरात में निवास करते हैं। केरल के लोग यहां सबसे अधिक संख्या में हैं, इसके बाद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग आते हैं।


उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और अन्य राज्यों के लोग भी इस समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।