विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया
नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली: भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली के एक महत्वपूर्ण अंग, चुनाव आयोग के प्रमुख मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व में विभिन्न विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों में उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग का नोटिस प्रस्तुत किया है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया है।
विपक्ष के आरोप
विपक्ष ने अपने नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें पक्षपातपूर्ण व्यवहार, मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ी, बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने और चुनावी गड़बड़ियों की जांच में बाधा डालने जैसे मुद्दे शामिल हैं। विशेष रूप से, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की चुप्पी
रविवार को जब चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की, तब पत्रकारों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से महाभियोग नोटिस के बारे में सवाल किया। हालांकि, उन्होंने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की और चुप्पी साध ली। उन्होंने सीधे सवाल का जवाब देने से बचते हुए पहले भी राजनीतिक आरोपों से जुड़े सवालों पर प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है।
चुनाव की तारीखों की घोषणा
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की कुल 824 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की है। असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। सभी राज्यों में मतगणना 4 मई को होगी।
युवाओं के लिए अपील
चुनाव आयोग के अनुसार, इन राज्यों में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हैं, जिनके लिए करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए लगभग 25 लाख चुनावकर्मी तैनात किए जाएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने विशेष रूप से पहली बार वोट देने वाले युवाओं से अपील की है कि वे अपने मताधिकार का जिम्मेदारी और उत्साह के साथ उपयोग करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में योगदान दें।