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विपक्षी एकता का परीक्षण: एसआईआर मुद्दे पर चिट्ठी पर हस्ताक्षर

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 8 जून को हुई बैठक में 21 दलों के नेताओं ने भाग लिया, लेकिन चिट्ठी पर 23 दलों ने हस्ताक्षर किए। डीएमके और आम आदमी पार्टी ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण है कि यह एकता संसद के मानसून सत्र में कितनी स्थायी रहती है। क्या विपक्षी दल एकजुट रहेंगे या उनके बीच की दूरी फिर से बढ़ेगी? जानें इस मुद्दे पर और अधिक जानकारी।
 

विपक्षी दलों की एकजुटता

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि 8 जून को हुई 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में 21 पार्टियों के नेता शामिल हुए थे। हालांकि, जब एसआईआर के संबंध में चीफ जस्टिस को पत्र लिखा गया, तो उस पर 23 दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि डीएमके और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।


यह ध्यान देने योग्य है कि दो साल बाद 8 जून को विपक्षी गठबंधन की बैठक हुई थी, जिसमें डीएमके और आम आदमी पार्टी शामिल नहीं हुए। डीएमके इस बात से नाराज है कि कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद उससे संबंध तोड़कर फिल्म स्टार विजय की पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन कर लिया। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी को जल्द ही पंजाब, गोवा और गुजरात में चुनाव लड़ने हैं, जिसमें पंजाब में उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस से होगा। इसलिए, वह कांग्रेस के साथ निकटता नहीं दिखाना चाहती। हरियाणा और दिल्ली विधानसभा चुनावों में दोनों दलों के बीच की दूरी भी स्पष्ट है।


इसलिए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि एसआईआर के मुद्दे पर जो एकता दिखाई गई है, वह कितने समय तक बनी रहती है। क्या संसद के मानसून सत्र में विपक्ष एकजुट रहेगा? अगले महीने हैदराबाद में प्रस्तावित बैठक में क्या यह एकता दिखाई देगी? 8 जून की बैठक में यह तय किया गया था कि हर दो महीने में एक बैठक होगी, और अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में होगी। हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है। 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने की संभावना है, जो अगस्त के तीसरे हफ्ते तक चलेगा। यह देखना होगा कि विपक्ष संसद सत्र के दौरान बैठक करता है या उसके बाद।


इस बार का मानसून सत्र खास होने वाला है। सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का बिल फिर से पेश करेगी, साथ ही परिसीमन का बिल भी होगा। पिछली बार विपक्षी एकता ने बिल को विफल कर दिया था। अप्रैल में सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया था, जिसमें विपक्ष ने एकता दिखाई थी। लेकिन उसके बाद कई चीजें बदल गई हैं। ममता बनर्जी चुनाव हार गईं और उनकी पार्टी टूट गई है। वहीं, एमके स्टालिन भी चुनाव हार गए और कांग्रेस उनसे अलग हो गई है। डीएमके ने विपक्षी गठबंधन से अलग बैठने के लिए जगह मांगी है। इसलिए, यह देखना होगा कि संसद सत्र में सरकार के बिल पर या रोजमर्रा की कार्यवाही में विपक्षी एकता बनी रहती है या नहीं।