विपक्षी एकता की परीक्षा: विधानसभा चुनाव 2024 की चुनौतियाँ
विपक्ष की एकजुटता का महत्व
दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों ने जो एकजुटता दिखाई है, उसकी असली परीक्षा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में होगी। यह चुनाव विपक्ष की राजनीतिक ताकत और उसके द्वारा बनाए गए नैरेटिव दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस एकजुटता में बसपा और आम आदमी पार्टी शामिल नहीं हैं, जो अगले साल के चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
अगले साल सात राज्यों में चुनाव होने हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात शामिल हैं। ये चुनाव भाजपा और विपक्ष दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्ष ने भाजपा को जो झटका दिया था, भाजपा उससे उबर चुकी है।
भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में जीत हासिल की है, जिससे उसके लोकसभा चुनाव के खराब प्रदर्शन का असर समाप्त हो गया है। झारखंड एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा का विजय रथ रुका है।
अगले साल जिन सात राज्यों में चुनाव होंगे, उनमें भाजपा मुख्य मुकाबले में है। चार राज्यों में भाजपा की सरकार है, और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा ने पिछले 10 सालों से सत्ता संभाली हुई है।
हालांकि, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर अन्य राज्यों में भाजपा के खिलाफ कोई स्पष्ट मुकाबला नहीं दिख रहा है। इन राज्यों में भाजपा और विपक्षी गठबंधन के अलावा कोई तीसरी ताकत भी मौजूद है।
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की भूमिका महत्वपूर्ण है, जो हर हाल में 10 फीसदी वोट हासिल करने वाली पार्टी है। दलित वोट का एक बड़ा हिस्सा मायावती के साथ जुड़ा हुआ है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होगा, जिसमें भाजपा तीसरी ताकत के रूप में उभर रही है। गोवा और गुजरात में भी कांग्रेस को आम आदमी पार्टी से चुनौती मिलेगी।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा। उत्तराखंड में भाजपा ने पिछले चुनाव में सत्ता बदलने की परंपरा को तोड़ा है, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह परंपरा अभी भी कायम है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस बार सत्ता बदलने की परंपरा को बदल सकेगी? अगर कांग्रेस अपने दम पर चुनाव जीतती है, तो इसका गठबंधन में उसकी स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।