विपक्षी गठबंधन की बैठक की संभावना कम, चुनावी नतीजों का असर
दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक की योजना
दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक की एक बैठक आयोजित होने वाली थी। यह बैठक संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के बाद, जो 16 से 18 अप्रैल तक चला, की योजना बनाई गई थी। यह निर्णय लिया गया था कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद इस बैठक का आयोजन किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने इस बैठक की रूपरेखा तैयार की थी। कहा जा रहा था कि महिला आरक्षण के लिए बनाए गए नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए परिसीमन बिल को विफल करने के जश्न के लिए यह बैठक होगी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में विपक्षी दलों ने एकजुटता का अद्भुत उदाहरण पेश किया था। किसी भी विपक्षी पार्टी के सांसद ने क्रॉस वोटिंग नहीं की और न ही कोई सांसद बिना सूचना के अनुपस्थित रहा। जानकार सूत्रों के अनुसार, चार मई के चुनाव परिणामों के बाद किसी दिन बैठक बुलाने की चर्चा हुई थी。
हालांकि, अब ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है कि यह बैठक होगी। इसका मुख्य कारण यह है कि चुनाव से पहले सभी दलों का मानना था कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टी जीत हासिल करेगी। विपक्ष का आत्मविश्वास ऊंचा था, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उन्होंने संसद में पहली बार सरकार का बिल गिराया है और यदि तीन बड़े राज्यों में जीत मिलती है, तो इसका भाजपा पर बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा। इस प्रभाव को बढ़ाने के लिए विपक्ष की बैठक की योजना बनाई गई थी। लेकिन परिणाम उलट गए। ममता बनर्जी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और एमके स्टालिन की पार्टी भी सत्ता से बाहर हो गई। इसके अलावा, कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके के साथ गठबंधन कर लिया, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई। डीएमके ने स्पीकर को पत्र लिखकर लोकसभा में कांग्रेस से अलग सीट की मांग की है। हालांकि, चुनाव परिणामों के बाद राहुल गांधी ने ममता बनर्जी का समर्थन किया, लेकिन विपक्षी गठबंधन की पार्टियों के बीच की स्थिति को देखते हुए तत्काल बैठक की संभावना कम नजर आ रही है।