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विपक्षी गठबंधन की बैठक में कांग्रेस की भूमिका पर उठे सवाल

विपक्षी गठबंधन की हालिया बैठक में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। विभिन्न दलों ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसे सभी पार्टियों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। इस बैठक में शामिल न होने वाले नेताओं के रवैये ने चर्चा को और बढ़ा दिया है। जानें इस बैठक के पीछे की राजनीति और कांग्रेस के भविष्य की दिशा क्या हो सकती है।
 

विपक्षी गठबंधन की बैठक का महत्व


विपक्षी गठबंधन, जिसे 'इंडिया' नाम दिया गया है, ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश भेजा है। यह कांग्रेस पर निर्भर करता है कि वह इस संदेश को कैसे ग्रहण करती है और आगे की राजनीतिक दिशा क्या होगी। वर्तमान में, देश के लोकतंत्र और संवैधानिक ढांचे के सामने एक गंभीर संकट है, जिसके बीच यह बैठक आयोजित की गई थी। सभी दलों को अपने मतभेद भुलाकर इसमें शामिल होना चाहिए था। यह ज्ञात है कि डीएमके ने किन कारणों से गठबंधन छोड़ा और आम आदमी पार्टी के लिए कांग्रेस के साथ रहना कितना चुनौतीपूर्ण है। फिर भी, चुनाव आयोग के मुद्दे पर सभी दलों को एकजुट होना चाहिए।


आप और डीएमके ने यह तय किया है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में कांग्रेस का समर्थन करेंगे। आप के सांसद संजय सिंह ने पुष्टि की है कि उनकी पार्टी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर चुकी है।


हालांकि, दोनों दल इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हैं, फिर भी बैठक में शामिल नहीं हुए। समाजवादी पार्टी का रवैया सबसे चौंकाने वाला था। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक में उपस्थित नहीं हुए। उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक से दूर रहे। यहां तक कि अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को भी बैठक में नहीं भेजा गया। बैठक के समय, अखिलेश यादव अपने चाचा और रिलायंस समूह के धनराज परिमल नाथवानी का नामांकन करा रहे थे। यह ध्यान देने योग्य है कि नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर थी, लेकिन उन्होंने उसी दिन बैठक के समय नामांकन कराने का निर्णय लिया।


झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लिया। सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने संकेत दिया कि कांग्रेस को एकल चलने की नीति को छोड़ देना चाहिए। सहयोगी दलों की दूरी का यही मुख्य कारण है। कांग्रेस इस समय यह सोच रही है कि उसका समय आ गया है और उसे किसी अन्य पार्टी की आवश्यकता नहीं है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस के समर्थक यह दावा कर रहे हैं कि भाजपा के दिन खराब चल रहे हैं, जबकि भाजपा ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत हासिल की है।


कांग्रेस को यह विश्वास हो गया है कि मुस्लिम और दलित उसके साथ हैं, और अब बाकी बहुजन का समर्थन प्राप्त करना बाकी है। कांग्रेस ने यह तय किया है कि उसे सामान्य जातियों का वोट नहीं चाहिए। इस दृष्टिकोण से अन्य दल परेशान हैं और उन्होंने कांग्रेस को संदेश दिया है कि उसे सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास करना चाहिए। सीपीएम ने बताया कि कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बैठक का निमंत्रण नहीं दिया, जो यह दर्शाता है कि उनके नेता नहीं आएंगे। लेकिन जब कांग्रेस संसद में आप के साथ तालमेल बनाती है, तो इस बैठक के लिए भी निमंत्रण देना चाहिए था।