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विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र भेजा है, जिसमें चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने और ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की गई है। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस पत्र को जारी करते हुए कहा कि देश के चुनावी लोकतंत्र को गंभीर खतरा है। जानें इस पत्र में और क्या कहा गया है और विपक्ष का क्या कहना है।
 

विपक्ष का पत्र और चुनाव आयोग पर सवाल


नई दिल्ली। विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को एक पत्र भेजा, जिसमें चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। इस पत्र पर 23 विपक्षी पार्टियों और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल के हस्ताक्षर हैं। यह पत्र 28 जून को भेजा गया था।


पत्र में विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकने और आगामी चुनावों में ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस पत्र को सार्वजनिक किया और स्पष्ट किया कि विपक्ष न्यायपालिका पर सवाल नहीं उठा रहा है।


वेणुगोपाल ने कहा, 'हमारे देश में चुनावी लोकतंत्र को गंभीर खतरा है। पारदर्शिता के लिए और इस उम्मीद में कि सर्वोच्च न्यायालय चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाएगा, मैं यह पत्र जारी कर रहा हूं।' पत्र पर डीएमके और आम आदमी पार्टी के नेताओं के भी हस्ताक्षर हैं, जो 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक में शामिल नहीं हुए थे।


पत्र में कहा गया है, 'जब संस्थाएं दमन के साधन बन जाती हैं, तो लोकतंत्र का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ जाता है। न्यायाधीश एकांतवास में नहीं रहते। आप भी जमीनी हकीकत से अवगत हैं।' इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि जब सभी उपाय विफल हो जाते हैं, तब भी लोग न्यायपालिका पर भरोसा करते हैं।


विपक्ष ने 2014 के बाद से चुनाव आयोग के कार्यों का विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि उस समय से पहले आयोग में शामिल व्यक्तियों की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठने के कुछ अपवादों को छोड़कर कोई उदाहरण नहीं था। लेकिन 2014 के बाद से हर नियुक्ति ऐसे व्यक्तियों की हुई है जो सरकार से निकटता रखते हैं और चुनाव परिणामों में हेरफेर के लिए सरकार के इशारों पर काम करते हैं। पत्र में मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाया गया है।