विपक्षी दलों की राष्ट्रपति से मुलाकात: सबूतों की प्रतीक्षा
विपक्ष का प्रदर्शन और राष्ट्रपति से मुलाकात
विपक्षी दलों ने 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यह मुलाकात चार दिनों तक चले पहले चरण के प्रदर्शन के समापन के अवसर पर हुई। 6 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय का घेराव किया। उसी दिन राहुल गांधी ने आकाशवाणी परिसर में धरना दिया। इसके बाद 7 अक्टूबर को जंतर मंतर की ओर मार्च किया गया और 8 अक्टूबर को सभी दल राजघाट गए। 9 अक्टूबर को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बैठकी के बाद राष्ट्रपति से मुलाकात की गई। राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति ने उनके वोट चोरी के आरोप को स्वीकार किया, हालांकि राष्ट्रपति ने केवल ज्ञापन लिया था।
राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति ने सबूत पेश करने को कहा है, और विपक्ष ने सबूत देने का आश्वासन दिया है। लेकिन दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि विपक्ष कब सबूत पेश करेगा। क्या यह माना जाए कि विपक्षी दल सबूत जुटा रहे हैं? यदि पहले से सबूत नहीं थे, तो विपक्ष ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप क्यों लगाए? राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग वोट चोरी कर रहा है। एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के बाद नए विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई है। राहुल ने पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे को छोड़ दिया था, लेकिन अब उन्होंने इस मुद्दे को फिर से उठाया है।
हालांकि, यह आश्चर्यजनक है कि राहुल या अन्य विपक्षी दल अभी तक राष्ट्रपति के पास सबूत नहीं ले गए हैं। इसके साथ ही, राहुल सहित कई विपक्षी नेताओं ने वोट चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। यह सवाल उठता है कि क्या राष्ट्रपति को ज्ञापन देना या सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाना केवल मीडिया के सामने एक इवेंट बनाने के लिए था? यदि ऐसा नहीं है, तो विपक्ष को सबूत पेश करने चाहिए। जानकार सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दल अभी इस विरोध प्रदर्शन को तेज नहीं करना चाहते हैं और शीतकालीन सत्र का इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान, कांग्रेस के नेता एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तैयारियों में जुटे हैं।