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विपक्षी पार्टियों की बैठक: क्या होगा एजेंडा?

दिल्ली में आठ जून को विपक्षी दलों की बैठक होने जा रही है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी भी शामिल होंगी। इस बैठक का मुख्य प्रश्न यह है कि इसका एजेंडा क्या होगा? क्या विपक्ष महंगाई और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएगा? हालाँकि, कॉकरोच जनता पार्टी ने पहले ही प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। क्या विपक्षी दल इस चुनौती का सामना कर पाएंगे? जानें पूरी कहानी में।
 

विपक्षी पार्टियों की महत्वपूर्ण बैठक


दिल्ली में आठ जून को विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जो संसद के बजट सत्र और पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद पहली बार हो रही है। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी भी शामिल होंगी, जो पहले ऐसी बैठकों में भाग नहीं लेती थीं। हालांकि, एमके स्टालिन की पार्टी इस बैठक से दूर रहने का निर्णय लिया है। आम आदमी पार्टी और वाम दलों में कांग्रेस के प्रति नाराजगी है, फिर भी दोनों दलों के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहेंगे।


इस बैठक का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इसका एजेंडा क्या होगा? क्या विपक्षी दल भाजपा पर आरोप लगाने के अलावा कोई ठोस योजना पेश करेंगे? क्या उनके पास आगामी राजनीतिक अभियानों के लिए कोई रणनीति है?


यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महंगाई, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि, नीट यूजी पेपर लीक, और 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गड़बड़ियों के खिलाफ कोई आंदोलन नहीं किया है। राहुल गांधी ने कुछ वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए, लेकिन धरना या प्रदर्शन करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। यहां तक कि उत्तर प्रदेश में, जहां चुनाव नजदीक हैं, विपक्षी दलों ने कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया।


इसलिए, यह देखना होगा कि क्या विपक्षी दल महंगाई और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ कोई आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो शायद बहुत देर हो चुकी होगी, क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी ने पहले ही प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। यह पार्टी अब एक सक्रिय भूमिका निभा रही है और जंतर मंतर पर छह जून को बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बना रही है। इसके संस्थापक अभिजीत दिपके ने अमेरिका से लौटने से पहले इसकी घोषणा की थी।


इस प्रकार, विपक्ष की बैठक एक औपचारिकता से अधिक कुछ नहीं प्रतीत होती है, क्योंकि वे खुद कोई ठोस कदम उठाने में असमर्थ रहे हैं।