विपक्षी पार्टियों की बैठक: चुनावी गड़बड़ियों का सामना करने की आवश्यकता
विपक्ष की बैठक का उद्देश्य
दिल्ली में 30 सितंबर को विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली के खिलाफ एकजुटता दिखाना है। मई में भी 'इंडिया' ब्लॉक की एक बैठक हुई थी, जिसमें कुछ दलों ने भाग नहीं लिया था, लेकिन इस बार सभी प्रमुख दल एक साथ आ रहे हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन क्या केवल बैठक करना ही पर्याप्त होगा?
विपक्ष को यह समझना होगा कि देश को जिन गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है, उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। 'इंडिया' ब्लॉक को औपचारिक रूप से स्थापित करने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है, जो कि पिछले साल शरद पवार के घर पर हुई बैठक के बाद से लंबित है।
विपक्षी दलों को यह भी समझना होगा कि उनका कार्य केवल चैरिटी करना नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना है। यदि वे एसआईआर की गड़बड़ियों को उजागर करते हैं और जनता के बीच ले जाते हैं, तो उन्हें राजनीतिक लाभ भी मिल सकता है।
हाल के समय में, आम लोग सरकार की कमियों को उजागर कर रहे हैं। छात्रों ने नीट पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी का खुलासा किया है। यह पहली बार है जब किसी मंत्री का इस्तीफा छात्रों के आंदोलन के दबाव में हुआ।
इसी तरह, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब होने का मुद्दा भी उठाया गया है। व्यापारी यूपीआई पर शुल्क लगाने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। इन सभी मुद्दों पर गहराई से काम करने की आवश्यकता है, लेकिन विपक्ष केवल संसद में इन मुद्दों को उठाकर संतुष्ट हो रहा है।
विपक्ष का रवैया सतही है। उन्हें हर मुद्दे पर गंभीरता से काम करना होगा। इतिहास गवाह है कि किसी भी मुद्दे पर सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है।
यदि विपक्ष चाहता है कि एसआईआर की गड़बड़ियों पर राजनीतिक माहौल बने, तो उन्हें निरंतरता दिखानी होगी। उन्हें हर तथ्य को जनता के सामने लाना होगा।
हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि पार्टियां केवल सतही तौर पर ही मुद्दों को देख रही हैं। राहुल गांधी ने पिछले साल कर्नाटक में वोट काटने के मामले का खुलासा किया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
यह महत्वपूर्ण है कि विपक्ष यह पता लगाए कि कौन लोग हैं जिनके नाम काटे जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में 38 लाख आवेदन लंबित हैं। क्या यह विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं है कि वे इन मामलों की जांच करें?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को गड़बड़ियों पर गहराई से काम करने की आवश्यकता है। यह एक समय लेने वाला कार्य है, लेकिन संसाधनों की कमी नहीं है। यदि उन्हें लगता है कि एसआईआर में बड़ी गड़बड़ी हो रही है, तो उन्हें इसे उजागर करने के लिए बड़े पैमाने पर काम करना होगा।
सिर्फ मुद्दों को छूकर आगे बढ़ने से सरकार जवाबदेह नहीं बनेगी। जनता को यह दिखाना होगा कि विपक्ष क्या कर रहा है।