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वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई: क्या भारत भी बन सकता है निशाना?

वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने चेतावनी दी है कि अगर भारत सतर्क नहीं रहा, तो ऐसी स्थिति यहां भी उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई को यूएन चार्टर का उल्लंघन बताया और भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए। मादुरो की गिरफ्तारी और न्यूयॉर्क में पेशी के संदर्भ में चव्हाण ने भारत की विदेश नीति पर भी चिंता जताई। क्या भारत भी अमेरिका के निशाने पर आ सकता है? जानें पूरी कहानी।
 

नई दिल्ली में कांग्रेस की चिंता


नई दिल्ली: वेनेजुएला में अमेरिका की हालिया कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने चेतावनी दी है कि यदि भारत सतर्क नहीं रहा, तो ऐसी स्थिति यहां भी उत्पन्न हो सकती है। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क की अदालत में पेश किया है।


चव्हाण की चेतावनी

चव्हाण ने भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश को अपनी विदेश नीति में स्पष्टता लानी चाहिए। उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई को यूएन चार्टर का उल्लंघन बताते हुए अन्य देशों के विरोध के उदाहरण दिए।


वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

पृथ्वीराज चव्हाण ने सोमवार को कहा, "वेनेजुएला में जो कुछ हुआ, वह यूएन चार्टर के खिलाफ है। एक निर्वाचित राष्ट्रपति का अपहरण किया गया। यह चिंताजनक है कि ऐसा किसी भी देश के साथ हो सकता है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने इस मामले पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।


उन्होंने आगे कहा कि रूस और चीन ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की, जबकि भारत ने चुप्पी साधी रखी। चव्हाण ने यह भी कहा कि भारत अक्सर अमेरिका के डर के कारण अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपने रुख को स्पष्ट नहीं करता।


अमेरिकी अदालत में मादुरो की पेशी

निकोलस मादुरो को मादक पदार्थों से जुड़े आतंकवाद के आरोपों के तहत सोमवार को पहली बार अमेरिकी अदालत में पेश किया गया। ट्रंप प्रशासन ने इन आरोपों का हवाला देकर मादुरो की गिरफ्तारी को उचित ठहराया।


मादुरो ने अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा, "मैं एक सभ्य व्यक्ति हूं, अपने देश का राष्ट्रपति हूं।" उन्हें और उनकी पत्नी को ब्रुकलिन जेल से सशस्त्र सुरक्षा के तहत मैनहट्टन कोर्टहाउस में ले जाया गया। उनके वकील इस गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाने की तैयारी कर रहे हैं।


भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय रुख

चव्हाण ने अमेरिका की कार्रवाई के संदर्भ में भारत की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश को स्पष्ट और सक्रिय रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष में भी भारत ने कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लिया।


चव्हाण ने कहा, "हम अमेरिका से इतने डरे हुए हैं कि जो हुआ, उसकी आलोचना भी नहीं कर रहे हैं।"