शरद पवार का चौंकाने वाला निर्णय: परिसीमन बिल का समर्थन
शरद पवार का अप्रत्याशित कदम
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक नेता और एनसीपी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने एक बार फिर अपने निर्णय से सभी को हैरान कर दिया है। विपक्ष के एक महत्वपूर्ण स्तंभ होने के बावजूद, उन्होंने संसद में परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल का समर्थन करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) इस महत्वपूर्ण विधेयक के पक्ष में वोट देने की योजना बना रही है। शरद पवार का यह कदम राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक हलचल का कारण
पवार के इस अप्रत्याशित निर्णय ने न केवल महाराष्ट्र, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषक इस कदम के विभिन्न अर्थ निकाल रहे हैं। कुछ इसे पवार की दूरदर्शी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानते हैं, जबकि अन्य इसे केंद्र सरकार के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, एनसीपी (एसपी) की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों ने पुष्टि की है कि पार्टी परिसीमन बिल के समर्थन में पूरी तरह से तैयार है।
परिसीमन बिल का महत्व
परिसीमन बिल का उद्देश्य: इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण नई जनगणना के आधार पर करना है। वर्तमान में, सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर निर्धारित है, जबकि पिछले पांच दशकों में जनसंख्या और परिस्थितियों में बड़े बदलाव आए हैं। इस विधेयक के पारित होने से संविधान के उन अनुच्छेदों में संशोधन किया जाएगा, जो सीटों के बंटवारे को मौजूदा जनसंख्या के आधार पर संभव बनाएंगे। इसके लिए एक नया परिसीमन आयोग स्थापित किया जाएगा। अप्रैल में प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 हो सकती है, जिससे लोकसभा की कुल सीटें 850 के पार जा सकती हैं।
सरकार की पिछली असफलता
इस साल अप्रैल में आयोजित संसद के विशेष सत्र में, सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया था। उस समय विपक्ष ने एकजुट होकर इस बिल का विरोध किया, जिसके कारण यह विधेयक सदन में गिर गया। उस समय सदन में 528 सांसद उपस्थित थे और बिल को पास कराने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे, जिससे सरकार महज 54 वोटों से चूक गई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि संख्या कम होना हार नहीं है और भविष्य में और भी मौके आएंगे। अब शरद पवार के समर्थन से इस बिल के पारित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।